गुरुवार, 31 अगस्त 2017

पाश्चात्य सभ्यता घटिया है?

Sanjeev Mongia
हमे जब भी मौका मिलता है ,हम पाश्चात्य सभ्यता को खूब लताड़ते है . और अपनी संस्कृति पर जम कर गर्व करते है . क्या बुरा करते है गोरे ? eat , drink and be merry ,क्या खराबी है , इस कथन में ? कम से कम वो दोगले तो नही है . जम कर पांच दिन मेहनत करते है और दो दिन ऐश.
और हम हिन्दुस्तानी . खूब गीता का महिमागान करेगे . लेकिन असलियत यह है की हम कर्म में नही भाग्य में विश्वास करते दिखते है . हर दूसरा , तीसरा आदमी , जन्हा तन्हा कुंडलिया बनवा कर , अपनी अंगूठी तैयार करता नजर आता है . अब तो टेरो कार्ड, वास्तुशास्त्र जैसी नई बलाए भी आ गई है . हर आदमी सोचता है , वेष्णु देवी या तिरुपति जैसी जगह जाने पर उसको मनवांछित फल मिल जाएगा .
और सब प्रयासों के बावजूद जब फल नही मिलता तो शनि देवता के साडे साती का प्रकोप समझ कर कर शांत हो जाता है . इस तरह के सब विचार , आदमी को बिलकुल निष्क्रिय बना देते है
इन बाबायो का पैदा होना उनकी चतुराई नही , बल्कि हमारा ... निठल्लापंन है .

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