रविवार, 25 दिसंबर 2022

गांधी और अछूत

अम्बेडकर भक्त कहते हैं कि गांधी जी मनु के वर्ण व्यवस्था के पक्षधर थे ।
तो क्या हुआ? मुंडे मुंडे मतिर्भिनाः। 
गांधी जी किसी शुद्र दलित को पढ़ने पढ़ाने, शिक्षक मंत्री बनने, वोट देने, से नहीं रोका । अछूतों से अछूत व्यवहार नहीं किया ।

शनिवार, 24 दिसंबर 2022

हरिजन/ दिब्यांग


गांधी जी ने कथित शुद्र दलित को प्यार से हरिजन कहा था. सम्मान देने की नियत से । (उन्होंने कभी किसी दलित शुद्र का तिरस्कार अपमान नहीं किया।) जैसे मोदी जी ने विकलांग अपंग को भी दिब्यांग नाम दिया उन्हें सम्मान देने के लिए ।
        कथित दलित शुद्रों को तिरस्कार के भाव से हरिजन कहें या SC उन्हें बुरा तो लगेगा ही । उसी तरह मोदी जी ने विकलांग अपंग दिब्यांग कहा  ।

मंगलवार, 1 नवंबर 2022

मस्तिष्क में गोबर

स्कूल में पढ़ाई के बाद वयस्क व्यक्ति अपने दिमाग में कुछ भी भरने के लिए स्वतंत्र होता है । वह चाहे तो गोबर भी भर सकता है जितना चाहे ।

मंगलवार, 25 अक्टूबर 2022

love u से आत्म हत्या तक

रावण की बहन शुर्पनखा का आई लव यू कहना कोई बहुत बड़ा गुनाह नहीं था|
रावण  ने सीता जी से जबर्दस्ती विवाह रचाने की कोशिश नहीं की| उन्हें अशोक वाटिका में रखा|
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सीता जी पर बार बार संदेह, बार बार परीक्षण? नारी अत्याचार की पराकाष्ठा| नारी ताड़न । परिणाम आत्महत्या । 
         अपराध बोध पश्चाताप 
सरयू नदी  में डूब  कर आत्म हत्या|

रविवार, 16 अक्टूबर 2022

आश्चर्य

बहुत आश्चर्य|
मानते हैं ईश्वर सर्वशक्तिमान हैं| वे सम्पूर्ण ब्रह्मांड का संचालन करते हैं  फिर भी हम उनके रहने बसने, खाने पीने की चिंता करते हैं| इस चिंता में हम मरते मारते भी हैं|

रविवार, 25 सितंबर 2022

ईश्वर

अल्लाह गॉड ईश्वर भगवान देवी देवता भूत प्रेत सब एक ही खानदान के हैं| उनके स्वभाव अलग अलग है|

सोमवार, 19 सितंबर 2022

अबला

पहले पुरुष ने स्त्री को अबला माना जिसे स्त्री ने मान लिया । इसलिये मनु ने यह व्यवस्था दी थी कि स्त्री की रक्षा उसका पिता,  भाई,  पति करेगा ।
अब स्त्री अबला नहीं है । संविधान ने उसे ताकत दी है ।

शुक्रवार, 16 सितंबर 2022

राम नाम

🤔🤔
अगर राम नाम सत्य है, तो बाकी के क्या है...? जैसे- ब्रम्हा, विष्णु, महेश, दुर्गा , काली, सरस्वती इत्यादि क्या ये सब नाम झूठ है...?🤔

गुरुवार, 15 सितंबर 2022

मृत्यु का उत्सव

हमारे देश में औसत आयु लगभग 70 वर्ष है ।
आचार्य रजनीश ने कहा है कि मृत्यु का स्वागत करना चाहिए । उत्सव मनाना चाहिये ।
हमारे देश में औसत आयु लगभग 70 वर्ष है ।
         70  वर्ष के बाद देहांत हो तो एकादश कर्म को उत्सव के रूप में मनाया जा सकता है.।
         अल्पायु में किसी का चले जाना बहुत ज्यादा दुखद होता है । एकादश कर्म के दिन सादा शाकाहारी भोजन होना चाहिए ।

ईश्वर की भाषा

सर्वश्क्तिमान ईश्वर लोग सिर्फ़ अपनी अपनी (एक -एक)भाषा में प्रार्थना सुनते हैं ।
संस्कृत, अरबी, अंग्रेजी . 
      जब कि दुनियां में बहुत भाषा बोली  हैं ।
कई लोग कई भाषा के जानकार होते हैं ।

मायाजाल

जीवन को मायाजाल कहकर उसकी सार्थकता को नकारना उचित नहीं|

शनिवार, 10 सितंबर 2022

विवाह

 मेरे विचार से बच्चों के लालन पोषण तथा यौन क्षुधा की पूर्ति के लिए विवाह एक सामाजिक व्यवस्था है। पति पत्नी के बीच एक अलिखित समझौता है किसके अनुसार वे एक दूसरे के सुख दुख में भागीदार होते हैं, सम्भोग करते हैं, अपने परिवार का मिलकर दायित्व संभालते हैं ।

किराये के मकान में रहने से उस मकान से भी प्यार हो जाता है । स्वाभाविक है शादी के बाद पति पत्नी के बीच प्यार पनपता है ।

मंगलवार, 6 सितंबर 2022

गुरुवार, 5 मई 2022

दंगाई और आतंकवादी


विधर्मियों से नफ़रत करने वाले चालाक धार्मिक कट्टर लोग दंगाई होते हैं ।
विधर्मियों से नफ़रत करने वाले मुर्ख धार्मिक कट्टर लोग आतंकवादी होते हैं ।

सोमवार, 25 अप्रैल 2022

मैं

मैं आस्तिक नहीं हूं ।
नास्तिक नहीं हूं ।
एक मनुष्य हूं ।
विद्यार्थी हूं ।

संस्कृति की चिंता

जो समझते हैं कि शहरी संस्कृति से, आधुनिक स्कूल कालेज की पढ़ाई से संस्कृति का विनाश हो रहा है, उन्हें अपने बच्चों को शहर जाने से रोकना चाहिए तथा  किसी गुरुकुल/वैदिक/ संस्कृत school में पढाना चाहिये । यदि ऐसे स्कूल कम पड़े तो मिलजुल कर नये स्कूल खोलना चाहिए जहाँ केवल  हिंदी , संस्कृत, वेद पुराण, गीता, भागवत, मनु स्मृति, ....  की पढ़ाई हो ।

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2022

धार्मिक आयोजन


सार्वजनिक स्थान में धार्मिक आयोजन (जुलुस, भाषण, अजान, प्रार्थना.....) बंद होना चाहिए ।
अपना अपना धर्म अपने घर में मानें। 

ध्वनि विस्तारक यंत्र का सदुपयोग

ऐसा कानून बनना चाहिये कि मंदिर मस्जिद. ....परिसर से किसी कार्यक्रम की आवाज बाहर न आए ।
 ध्वनि विस्तारक यंत्र

गुरुवार, 14 अप्रैल 2022

हिंसा अहिंसा

भगत सिंह सुभाष .... .और नेहरू गांधी ... . के रास्ते अलग अलग थे लेकिन मंजिल एक ही थी देश की आजादी । एक हिंसा दूसरा अहिंसा । दोनो के विचार धारा बिल्कुल अलग थे ।
अहिंसावादियों ने भगत सिंह को फांसी से बचाने के लिए कुछ नहीं किया ।
 लेकिन उस समय के सबसे बड़ा संगठन था RSS 
उसके लोग भी भगत सिंह को बचाने के लिए कुछ नहीं किये ।

शनिवार, 2 अप्रैल 2022

विद्यार्थियों के लिए


          मेरे विचार से विद्यार्थियों के लिए कोई छुट्टी नहीं होती । sunday हो या monday, दिवाली छुट्टी हो या गर्मी की छुट्टी । रोज पढाई करनी चाहिए । समय का सदुपयोग करें ।
        परीक्षा के बाद छुट्टी में भाषा सुधार, शब्दार्थ, व्याकरण, निबंध रचना, डायरी लेखन, सामान्य गणित, GK, Reasoning  के लिए समय देना चाहिए । इस के अलावा सोचें कि पिछली कक्षा के कौन कौन से topic आगे काम आयेगा उस पर भी समय देना चाहिए ।

रविवार, 27 मार्च 2022

नास्तिक

ईश्वर के अस्तित्व पर
कुछ लोग जीवन भर जानने की कोशिश करते हैं नहीं जान पाते| कुछ लोग जानना ही नहीं चाहते कही सुनी लिखी गई बातों को मान लेते हैं| कुछ जानने की कोशिश कर अंततः नास्तिक हो जाते हैं
नास्तिक हुए ---
ऋषि चार्वाक
ऋषि जाबालि
गौतम बुद्ध
वीर भगत सिंह
पेरियार स्वामी
डॉ कोबूर
सरिता के संपादक विश्वनाथ
और भी बहुत....
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दुनियां में बहुत लोग ईश्वर के अस्तित्व पर जानना चाहते हैं| बेहतर है उसके अस्तित्व सिद्ध करने के लिए उचित आधार तर्क की जानकारी सोशल मिडिया में दें| फेसबुक के हजारों पाठकों को लाभ होगा|..

शनिवार, 5 मार्च 2022

मनु रामायण महाभारत काल के बाद के थे

रामायण  महाभारत के बाद मनु स्मृति 
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 मनु स्मृति के अनुसार चार वर्ण ब्राह्मण , क्षत्रीय,  वैश्य, शुद्र का 
काम क्रमशः -
ब्राह्मण - पढ़ना पढ़ाना,  यज्ञ हवन पूजा पाठ करना , दान दक्षिणा लेना। 
क्षत्रीय - अश्त्र शस्त्र धारण कर राज्य के लिये युद्ध करना ।
वैश्य - व्यापार करना। समय और स्थान परिवर्तन से किसी वस्तु, मुद्रा के मूल्य में वृद्धि अर्थात लाभ कमाना।
(वैश्य संस्कृत [संज्ञा पुल्लिंग] 1. हिंदू वर्णव्यवस्था में निरूपित तीसरा वर्ण,  उक्त वर्ण का व्यक्ति 2. व्यापार करने वाला व्यक्ति ; व्यापारी।)
शुद्र - सेवा करना ।
मनु ने चारों वर्ण के लिये अलग अलग उपनाम लिखने का निर्देश दिये  है। उच्च तीन वर्णों को निम्नानुसार अलग अलग जनेऊ धारण करने का निर्देश दिये हैं ।
वर्ण   - उपनाम - जनेऊ 
ब्राह्मण - शर्मा  -  रेशम 
क्षत्रीय  - सिंह  -  कपास 
वैश्य     - गुप्त  - जूट
शुद्र      - दास 
(ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य, ये तीन वर्ण विद्याध्ययन से दूसरा जन्म प्राप्त करते हैं | विद्याध्ययन न कर पाने वाला शूद्र, चौथा वर्ण है | इन चार वर्णों के अतिरिक्त आर्यों में या श्रेष्ट मनुष्यों में पांचवा कोई वर्ण नहीं है।)
 मनु स्मृति को रामायण, महाभारत काल से पहले का माना जाता है किन्तु  यह सत्य प्रतीत नहीं होता । क्योंकि मनु के निर्देशानुसार वर्ण अनुसार  उपनाम लिखने का कोई प्रमाण रामायण, महाभारत,भगवद्गीता  में नहीं मिलता । कहीं नहीं लिखा है.. राजा श्री दशरथ सिंह, श्री राम सिंह, श्री पांडु सिंह, श्री दुर्योधन सिंह, युधिष्ठिर सिंह.......

गुरुवार, 3 मार्च 2022

हिन्दू धर्म नहीं संस्कृति है

वेद, गीता , रामायण, राम चरित मानस.... में हिन्दू धर्म का उल्लेख नहीं  है ।
उच्चतम न्यायालय ने हिन्दू को एक जीवन शैली कहा। यह धर्म नहीं, संस्कृति है ।
भारतीय जीवन शैली ही हिन्दू संस्कृति है । जो गंगा जमना
तहजीब है ।

शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2022

सोच विचार

कुछ पढ़ कर, सुन कर  सोच विचार करने वाले के मन में प्रश्न होते हैं ।
बिना सोच विचार किये मान लेने वाले के मन में कोई संशय प्रश्न नहीं होते ।

शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2022

इंसानियत

 गीता कुरान बाइबल तो अपनी अपनी बात कहते हैं , एक संविधान ही है जो इससे उपर उठकर सिर्फ इंसानियत की बात कहता है |

जय संविधान

शनिवार, 29 जनवरी 2022

राजनीति से सारोकार

सभी जागरूक नागरिक (पात्र मतदाता) अपने मत का उपयोग करते हैं । याने प्रजातंत्र में सभी नागरिक देश की राजनीति में भाग लेते हैं ।
      कोई यह कहे कि - 
"मुझे राजनीति से कोई मतलब नहीं।" 
यह सच नहीं है । सब को देश की राजनीति से सारोकार है, होना भी चाहिए ।
राजनीति से संबंधित विचार पढ़ना सुनना चाहिए ।

बुधवार, 12 जनवरी 2022

ठेका

लजाना, शरमाना, संस्कृति परम्परा रक्षा.. सब का ठेका स्त्रियों को दे दिया गया है । वे वह सब सहर्ष स्वीकार कर पूरी जिम्मेदारी के साथ निभा रही  हैं ।

शनिवार, 8 जनवरी 2022

राजनीति

राजतंत्र में नगर के निवासी नागरिक होते हैं ।
नगर के बाहर राज्य की सीमा में रहने वाले प्रजा कहलाते हैं ।
नागरिक और प्रजा के अधिकार , सुख सुविधा में अंतर होता है ।
इसी लिये प्रजा कहती है -
होइहि सोइ जो राम रचि राखा।
        लेकिन लोकतंत्र में देश के सभी निवासी (अस्थायी रूप से कुछ समय के लिए निवास करने वाले विदेशियों छोड़कर) देश के नागरिक होते हैं । सभी जागरूक नागरिक (पात्र मतदाता) अपने मत का उपयोग करते हैं । याने प्रजातंत्र में सभी नागरिक देश की राजनीति में भाग लेते हैं ।
      कोई यह कहे कि - 
"मुझे राजनीति से कोई मतलब नहीं।" 
यह सच नहीं है । सब को देश की राजनीति से सारोकार है, होना भी चाहिए ।
राजनीति से संबंधित विचार पढ़ना सुनना चाहिए ।

गुरुवार, 6 जनवरी 2022

महा मृत्युंजय जाप


महा मृत्युंजय जाप पूरे देश के लिए संसद में करा दें तो चीन पाक अमेरिका रूस ......... सब कापेंगे ।

मंगलवार, 4 जनवरी 2022

जलन

मोहन दास करम चंद गांधी जी को राष्ट्रपिता, बापू , महात्मा कहने से कुछ लोगों को तकलीफ हो रही है । 
       जो चाहे कहें, जो न चाहें न कहें ।

         ऐसा कहने के  लिए कोई सरकारी आदेश तो  नहीं है ।