कब तक शव ममियों की पूजा करते रहोगेे? इतनी बड़ी दुनियां इतने सारे लोग| आओ सबसे प्यार करें|
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
सोमवार, 27 नवंबर 2017
सार्वजनिक जगह का दुरुयोग
कोई भी धार्मिक कार्य गतिविधि जुलुस सार्वजनिक जगह सड़क आदि पर नहीं होना चाहिए|
अम्बेडकर जी महान
अम्बेडकर जी ने संविधान का प्रारूप लिखा जिसे पारित किया सभा ने| अर्थात सब के मत से संविधान बना| केवल अम्बेडकर की नहीं चल सकती थी यह समझना चाहिए| अम्बेडकर जी महान थे बेशक लेकिन उन्हें सबसे महान सिद्ध करने के लिए बाकी सबको कमतर बताना गलत है , मूर्खता है|
शनिवार, 25 नवंबर 2017
संस्कृति परम्परा में परिवर्तन
हमारी संस्कृति परम्पराओं में परिवर्तन--
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पहले---
बहुपत्नी विवाह, सती प्रथा, बाल विवाह,. .., ...
धोती कुरता, साड़ी, बैल गाड़ी, .. , .. ......, ...
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आज--
परम्परा संस्कृति विरुद्ध _
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हिंदू विवाह अधिनियम, .., . , ....
आम जन के लिए स्कूल कॉलेज.. ,.. , ...
आधुनिक पहनावा, बिजली, स्टील प्लास्टिक बर्तन, गैस चुल्हा, रेफ्रिजेटर, कम्प्युटर, टी वी, मोबाइल.., ... , ..
शुक्रवार, 24 नवंबर 2017
अप्प दीपो भव
विभिन्न धर्मो के नियमों तथा मापुरुषों के विचारों में बहुत विभिन्नता है| सबका का पालन अनुसरण संभव नहीं| इसीलिए गौतम बुद्ध ने कहा अप्प दीपो भव|
इंसानियत ही मेरा धर्म
मैं धर्म निरपेक्ष secular हूं, धर्म निरपेक्ष रहूंगा| गाली गलौज करना मेरा धर्म नहीं है| इंसान हूं, इंसानियत मेरा धर्म है|
सुधार
पहले अपने अंदर के दोष को देखें | अपने और अपने धर्म की बुराई दूर करें तो हम और हमारा धर्म बेहत्तर होंगे| हम सुधरें तो युग सुधरेगा|
अंतर्जातीय विवाह
आश्चर्य है हम आज भी कितने असहिष्णु हैं|
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अंतर्जातीय विवाह भारतीय दंड संहिता के अनुसार कोई अपराध नहीं है| शासन ऐसे विवाह को प्रोत्साहन करती है|
लेकिन कुछ जातीय सामाजिक संगठन इस विवाह को स्वीकार नहीं करते| उस परिवार को बहिष्कार का दंड दिया जाता है| बहिष्कार से बचने के लिए समाज के पारम्परिक नियम अनुसार लड़़का/लड़की को मृत मानकर उनके घर के लोगों को बिसर खाना पड़ता है तथा डाति समाज को मृतक भोज देना पड़ता है|
हमारे समाज के इस क्रूरता के कारण अंतर्जातीय विवाह के इच्छुक लड़के लड़कियां आत्महत्या भी कर लेते हैं|
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क्या इसपर विचार नहीं करना चाहिए? या परम्परा को ढोते रहना ही उचित है?
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पौराणिक काल, महाभारत काल में अंतर्जातीय विवाह समाज में स्वीकार था| फिर आज क्यों नहीं?
हमारा संविधान बनता या नहीं
एक प्रश्न?
ये बाबा भीमराव अम्बेडकर जी नहीं होते तो हमारे भारत का संविधान बनता या नहीं?
आत्मा की अवधारणा
एक अनुत्तरित, मन को अशांत कर देने वाला प्रश्न - मृत्यु पश्चात क्या? इसका जबाब है आत्मा की कल्पित अवधारणा | मन को सकून देता है मान लेने से|
गीता में कहा है- जिस तरह शरीर पूराने वस्त्र को त्याग कर नया धारण करता है वैसे ही आत्मा समय आने पर पूराने शरीर को त्याग कर नए रूप में जन्म लेती है|
बुधवार, 15 नवंबर 2017
नकल करना ही धर्म है?
Meraj Anwar
ये तो सभी जानते हैं कि अपने पैग़म्बर की नक़ल करना सुन्नत कहलाता है। मसलन दाढ़ी रखना, क़ुर्बानी करना, कुर्ता पायज़ाम पहनना, बकरी चराना, लौकी खाना... ऐसी बहुत सारी चीज़ें हैं जिसे सुन्नत कहा जाता है।
पर कुल मिलाकर सारा का सारा सुन्नत केवल दाढ़ी बढ़ाना, मूँछे काटना, छोटा पायज़ाम पहनना और बड़ा कुर्ता पहनना पर ही क्यूँ अटक गया हैं? और लोग इसे कट्टरता से मानते भी हैं। माने दाढ़ी के बारे में कुछ कह दो तो लोग ग़ुस्सा हो जाते हैं। इस्लाम से ख़ारिज तक बता देते हैं। ज़िंदगी भर लोग धार्मिक कृत्य मानकर दाढ़ी ढोते रहते हैं...
जितनी कट्टरता से दाढ़ी ढोया जाता है उतनी कट्टरता से रोज़ लौकी खाना, बकरी चराना, खेत में लोटा लेकर जाना, ऊँट पर सवारी करना... आदि इत्यादि क्यूँ नही माना जाता है?
या फिर दाढ़ी-मूँछ कपड़े को एक धार्मिक सिम्बल बना देने की जगह... फ़ैशन के हिसाब से क्यूँ नही बदलते रहते हैं लोग? जैसे कि जब मन हो लौकी खाना और जब मन हो भिंडी..
रविवार, 12 नवंबर 2017
हमारी उदार संस्कृति
हमारी हिंदू संस्कृति मुस्लिम जैसी संकीर्ण नहीं, उदार है| हमारे ऋषि जाबालि चार्वाक, गौतम बुद्ध, भगत सिंह नास्तिक थे|
शनिवार, 11 नवंबर 2017
पोस्ट कार्ड से जन्म
हम बहुत चालाक हैं इसलिए हमने अधिक भगवान देवी देवता पैदा कर लिए| संतोषी माता और साईं भगवान का जन्म पोस्ट कार्ड से हु़आ|
इंसानियत
नास्तिक अधार्मिक नहीं होता| उसका धर्म इंसानियत होता है| जरुरी नहीं कि तथाकथित धार्मिक हिंदू मुस्लिम .. इंसानियत को मानते हों|
धार्मिक कट्टरता
मुस्लिम में हिंदुओं से अधिक कट्टरता और संकीर्णता होती है इसलिए हिंदुओं में सेकुलर , नास्तिक अधिक होते हैं मुस्लिम की अपेक्षा|
अहंकार
शुक्रवार, 10 नवंबर 2017
धर्म
सभी धर्म इंसानियत के दुश्मन हैं| जब तक दुनियां में ये धर्म बने रहेंगे प्रेम, इमानदारी, मानवता में कमी आती रहेगी|
गुरुवार, 9 नवंबर 2017
आस्तिक से नास्तिक
खाली दिमाग में आस्था भरकर आस्तिक बनाया जाता है| सोच समझकर बाद में कुछ लोग नास्तिक बन जाते हैं| जैसे ऋषि चार्वाक, ऋषि जाबालि, गौतम बुद्ध, भगत सिंह, डॉ कोबूर.... .....
बुधवार, 8 नवंबर 2017
मृत्यु के बाद
मृत्यु के बाद पता नहीं क्या होगा?
शव को जला देने या गाड़ देने की अपेक्षा मेडिकल कॉलेज को प्रदान करना उचित होगा|
कोई अंग किसी के काम आएगा|
विद्यार्थी प्रेक्टिकल कर सीखेंगे|
मंगलवार, 7 नवंबर 2017
धार्मिक कट्टरता
धार्मिक कट्टरता सोच विचार नहीं करती, तर्क नहीं करती| बसुधैवेकम् कुटुम्बकम् की दुश्मन होती है| आतंकवाद को जन्म देकर पालती है|
नई सोच को को स्वीकार करने में रोकती है|
सोमवार, 6 नवंबर 2017
मैं हूँ भ्रष्टाचार
मैं हूं भ्रष्टाचार | मैं सर्वब्यापी| | हर कोई मुझे चाहता है अंत समय से कुछ पहले मेरा साथ छोड़ कर परलोक सुधारने की कोशिश करता है|
रविवार, 5 नवंबर 2017
चुनाव में उम्मीदवारों को कसम
किसी संस्था, संगठन, पंचायत, विधान सभा संसद.... के चुनाव के पहले उम्मीदवारों को अपने कुलदेवी/ श्री दुर्गा देवी के मंदिर में या मस्जिद गुरुद्वारा ... में कसम करनी चाहिए कि वे कभी किसी संस्था संगठन सरकार का कभी रूपया पैसा नहीं खाए हैं| कभी नहीं खाएंगे| अपने पद का उपयोग निजी लाभ के लिए नहीं करेंगे|