शुक्रवार, 21 जून 2024

सेकुलर

सेकुलर गद्दार नहीं होते। वे अपने मस्तिष्क का उपयोग करते हैं। कट्टर धार्मिक लोग लकीर के फकीर होते हैं जो अपने धर्म को अपने देश के संविधान से अधिक महत्व देते हैं। वे दिमाग का पूरा उपयोग नहीं करते । ऐसी धार्मिक कट्टरता ही आतंकवाद को जन्म देती है

प्रणाम

 मुझे नहीं पता..मैं नास्तिक हूं या नहीं| हां फिलहाल मैं आस्तिक नहीं हूं| लेकिन महापुरुषों के चित्र प्रतिमा समाधि को उनके सम्मान के लिए हाथ जोड़कर प्रणाम करता हू्| कभी कभी मंदिरों में भी प्रणाम करता हुं। हो सकता है वे भी देश दुनियां के हित में कुछ अच्छा किए हों।

       लेकिन मत्था टेककर उनसे कुछ मांगता नहीं| कुछ चढ़ावा नहीं देता|

आत्मा और पुनर्जन्म

 सोचने की बात तो है| तर्क करने से ये आत्मा की धारणा अवैज्ञानिक लगती है झूठ लगती है|

लेकिन आत्मा का पुरजन्म होना यह दर्शन "मृत्यु के बाद क्या ?" का एक खुबसूरत जबाब है| इसे मान लेना मन को सकून देता है, मृत्यु भय को कम करता है| वरना सोच सोच कर कि मृत्यु के बाद क्या होगा? नींद नहीं आती.  मन व्याकुल पागल होने लगता है|


प्रेम और मानवता

प्रेम मानवता ही हमारा धर्म होना चाहिए | लेकिन सभी धर्म एक दूसरे के विरुद्ध घृणा द्वेष फैला रहे हैं| दुनियां में बहुत सारे भगवान, खुदा, गॉड हैं जो मनुष्यों के बीच दिवाल खड़े कर रहे हैं|

Intelligent

 जो पढ़ कर, देख कर सोच विचार करते हैं वे ही सवाल करते हैं । वही intelligent होते हैं ।

बाकी लोग बिना सवाल किए 

अपने अणु मस्तिष्क में भरते जाते हैं ।

हवन

 कहते हैं हवन से वेक्टेरिया नष्ट होते हैं । भारत में इतने हवन होते हैं,  फिर भी विभिन्न वेक्टेरिया भरे हैं।

आस्तिक - नास्तिक - मानावता

 धार्मिक पुस्तकों ग्रन्थों को पढ़ कर, समझ कर ही कोई नास्तिक बनता है।

नास्तिक व्यक्ति का धर्म होता है मानवता।