शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

भारतीय संस्कृति और अंतर्जातीय विवाह

वैदिक, पौराणिक काल में, द्वापर त्रेता युग में क्या अंतर्जातीय विवाह होते थे| यदि हां तो कृपया उदाहरण सहित जानकारी दें|

मंगलवार, 26 दिसंबर 2017

मुर्गा मांस खाना उचित है?

मांसाहारी बकरा बकरी, भेड़, मछली, हिरण चिड़िया ...सब खाते हैं लेकिन कुछ जाति में मुर्गा मांस का निषेध है| जातीय सामाजिक संगठन वाले मुर्गा मांस खाने वाले को दंडित करते हैं?
मुर्गा मांस से क्यों परहेज करते हैं? इससे खाने वाले को या समाज को क्या क्या हानि होती है?

मुर्गा मांस खाना उचित है?

मांसाहारी बकरा, भेड़, मछली, हिरण चिड़िया ...सब खाते हैं लेकिन कुछ जाति में मुर्गा मांस का निषेध है|
निषेध के बावजूद बहुत लोग खाते हैं | सामाजिक नियम का पालन नहीं करते तो नियम बनाने का क्या औचित्य?
जातीय सामाजिक संगठन वाले मुर्गा मांस खाने वाले को दंडित करते हैं?
मुर्गा मांस से क्यों परहेज करते हैं? खाने वाले को या समाज को क्या क्या हानि होती है?

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

लड़कियों की व्यथा

हमारे समाज के लड़के कम सुंदर लड़कियों को पसंद नहीं करते| फलस्वरूप कई लड़कियां घर से भाग कर अपनी मर्जी से शादी कर लेती हैं जिसे परिवार, समाज स्वीकार नहीं करता|  कुछ विवाह की उम्मीद लिए बूढ़ी हो जाती हैं| यह बहुत दुखद स्थिति है| हमारा जाति समाज उन लड़कियों के जीवन बसाने के लिए कुछ नहीं करता किंतु दंडित करने के लिए तत्पर रहता है|

बुधवार, 20 दिसंबर 2017

अंतर्जातीय विवाह पर कठोर दंड

छत्तीसगढ़ जिला रायगढ़ पुसौर क्षेत्र के गाँव की एक इंटेलिजेंट लड़की के आई टी रायगढ़ से इंजिनियरिंग पढ़कर एक साल अध्यापन की| NIT राउरकेला में पी जी पढ़ाई पूरी कर वह इंजिनियर कॉलेज भुवनेश्वर में प्राध्यापक है|
     एक विचारशील सज्जन श्री के एन प्रधान ने उस लड़की की व्यथा सुनाई|
    उसके पिता जीअपने कई परिचितों रिश्तेदारों से बोले - "हामर झीअ र लागी पीला देखबअ  (हमारी लड़की के लिए लड़का देखेंगे)| समय बीतता रहा| हमारे कोलता समाज का कोई पढ़ा लिखा लड़का उस लड़की को पसंद नहीं किया| क्योंकि वह सुंदर नहीं थी, काली थी| इसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार नहीं थी|
शादी की उम्र निकल रही थी | अन्ततः उसने एक विजातीय लड़के से विवाह कर लिया| (उसके इस साहसपूर्ण कदम के लिए मैं बधाई देना चाहता था किंतु मेरे मोबाइल में उसका नम्बर डिलिट हो गया था|) उन्होंने आगे बताया कि उनके गाँव में उस परिवार को जात भात करने, जुर्माना करने, जाति बहिष्कार करने की चर्चा चल रही है| शायद उसके माता पिता को अपनी उस पुत्री को मृत मानकर बिसर खाना पड़ सकता है| जाति समाज को भोज देना पड़ेगा|
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       हमारे जाति - समाज द्वारा उस लड़की के लिए सहयोग सहायता कुछ नहीं लेकिन भोज खाएंगे, दंडित करेंगे, उसे मृत मान लेंगे| उस लड़की का अपने माता पिता के घर आना प्रतिबंधित होगा| अन्यथा पूरे परिवार को जाति से बहिष्कार|
      वाह! हम और हमारे समाज की यह क्रूरता भी अद्भुत है| हम महान| हमारी संस्कृति महान?
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      श्री केदार नाथ प्रधान जी से मैंने कहा कि उस नव दम्पति को रायगढ़ में आशीर्वाद समारोह का आयोजन करना चाहिए|
     हमें पहुँचकर उन्हें शुभकामना देनी चाहिए|
मेरे इस विचार से वे सहमत हुए|

समाज सेवी श्री एस डी पंडा

छत्तीसगढ़ रायगढ़ पूर्वांचल के एक महान समाज सेवी
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        हेम सुंदर गुप्ता शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला महापल्ली के पूर्व प्राचार्य, सेवा निवृत शिक्षा अधिकारी श्री शशिधर पंडा जी  ग्राम महापल्ली के निवासी हैं|
        वे सेवा निवृत्ति पश्चात अपना पूरा समय समाज सेवा में देते हैं|
           उन्होंने महापल्ली में जन सहयोग से दो मंदिरों की स्थापना की|
           एक गायत्री मंदिर जहाँ देवी गायत्री तथा अन्य देवी देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं| रोज सुबह शाम पंडा जी आकर पूजा करते हैं| कभी कभी यज्ञ हवन भी कराते हैं|
            एक और मंदिर बटमूल आश्रम महाविद्यालय जहाँ किसी देवी देवता की प्रतिमा नहीं है|  वहाँ साक्षात देवी देवताओं के द्वारा देवों के देव महादेव श्री शशिधर पंडा जी के मार्गदर्शन में शिक्षार्थियों को उत्तम शिक्षा दी जाती है|
           श्रद्धेय  श्री पंडा जी रोज महाविद्यालय में पूरा समय देते हैं|         
            इस विद्या मंदिर के  महादेव और  देवी देवताओं को नमन|

समाज सेवी श्री मनोज स्वाईं

समाज सेवा करने के लिए किसी जातीय सामाजिक संगठन का पदाधिकारी होना आवश्यक नहीं है|
शिक्षा के लिए समर्पित छत्तीसगढ़ रायगढ़ पूर्वांचल ग्राम कुकुर्दा के श्री मनोज स्वाईं जो स्कूल शिक्षा सुधार के लिए पागल हो चुके हैं, जो तन मन धन दे रहे हैं, स्कूलों में जाकर बहुत परिश्रम कर रहे हैं|
क्या यह समाज सेवा नहीं है?

मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

समाज सेवा

एक जातीय सामाजिक संगठन के बड़े नेता ने मुझसे कहा -  "आप सेवा निवृत्ति के बाद समाज सेवा करते हैं?"
मैंने कहा - "हाँ| अपने तरीके से  मुझसे जो बनता है करता हूँ|
उन्होंने कहा - " नहीं, वो नहीं| मैं अपनी जाति समाज की बात कर रहा हूँ|"
मैंने कहा - "मैं ऐसा कुछ तो नहीं करता|"
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मैं अपने गाँव के  सैकड़ों विद्यार्थियों को घर में सुबह शाम कई साल निःशुल्क पढ़ाया| अपने गाँव में गरीब विद्यार्थियों के सहयोग के लिए विद्यार्थियों के सहयोग से गाँधी निधि का संचालन किया| गाँव में एक पुस्तकालय की स्थापना कर सैकड़ों पुस्तकें देने के अलावा कई पत्रिकाएँ नियमित मंगाता था| अपने गाँव में हर साल होने वाले साँस्कृतिक कार्यक्रम में कई साल तक विद्यार्थियों के उत्साह वर्धनार्थ  पुरष्कार का व्यय वहन किया|
अपने स्कूल के कई जरूरतमंद विद्यार्थियों को परीक्षा फीस, पाठ्य पुस्तक दिया हूँ| सेवा निवृत्ति के बाद बटमूल आश्रम महाविद्यालय महापल्ली जिला रायगढ़ के पुस्तकालय को जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए हर साल एक सेट विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित पुस्तकें देता हूँ| छ: पत्रिकाएँ (हंस, समर लोक, लोकाक्षर, अभियान, तर्कशील, आरोग्य) डाक से सीधे महाविद्यालय को भेजने के लिए आजीवन सदस्यता शुल्क पटाया हूँ| पत्रिकाएँ नियमित पहुँच रही हैं| इसके अलावा उस विद्या मंदिर में एक बार दान भी दिया| क्योंकि वह एक ऐसा मंदिर है जहाँ साक्षात देवी देवता देवों के देव महादेव श्री शशिधर पंडा जी के मार्गदर्शन में बहुत कम वेतन लेकर विद्या दान करते हैं|
     कभी कभी मेरे मित्र आनंद प्रधान के साथ हमारे क्षेत्र के स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं| इंटेलिजेंट बनने के गुर बताते हैं| सामान्य ज्ञान, स्वास्थ्य की बातें बताते हैं|
      हमारे गाँव लोइंग के सेवा निवृत शिक्षक  रविवारीय स्वाध्याय केंद्र में पढ़ाते हैं|
       मैं इतने में ही खुश हूँ| इससे ज्यादा नहीं कर सकता|
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            हमारे रायगढ़ पूर्वांचल में महान व्यक्ति भी हैं जो अपनी ही जाति के़ लिए नहीं सम्पूर्ण समाज की सेवा करते हैं| अधिकतम समय तथा तन मन धन दे रहे हैं| उन्हें नमन करते हुए उनकी गाथा लिखूंगा|

रविवार, 17 दिसंबर 2017

यः धारयति सः धर्मः

यः धारयति सः धर्मः| जो धारण करे वह उसका धर्म है|
जरूरी नहीं कि कोई हिंदू मुस्लिम.... धर्म ही धारण करे| वह मानवता सच्चाई प्रेम को भी धारण कर सकता है| वही उसका धर्म होगा|

शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017

संस्कृति रक्षा के ठेकेदारों का गणवेश

यह हाफ पेंट हमारे देश की संस्कृति के अनुरूप था? संस्कृति रक्षा के ठेकेदारों के द्वारा जांघ दिखाऊ गणवेश क्यों तय किया गया सौ साल तक चलाते रहे| इस वेष से क्या लाभ था? क्या कोई वैज्ञानिक तथ्य है या मशीनरी युग के लिए सुविधाजनक मानते रहे अब तक? अब बदल दिए फुल पेंट क्यों?

गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

जैसा आहार वैसा विचार?

पश्चिमी देशों में मांसाहारी अधिक हैं| हमारे देश में कुछ मांस शाकाहारी हैं और कुछ शाकाहारी| कहते हैं जैसा आहार वैसा विचार, वैसा ही व्यवहार होगा|
तो क्या हमारे देश में पश्चिम की अपेक्षा इंसानियत अधिक है?
क्या  मांसाहारी क्रूर चोर डाकू घटिया भ्रष्ट कपटी बेइमान जलनखोर स्वार्थी .... ... होते हैं?