हमारी पुरानी धार्मिक आस्था- नर बलि, सती प्रथा, बाल विवाह, विधवा विवाह पर निषेध, छूआछूत.....?
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
बुधवार, 24 अक्टूबर 2018
मंगलवार, 23 अक्टूबर 2018
नया जमाना, नई पीढ़ी
लकीर के फकीर कोई नई बात, कोई परिवर्तन सुनना भी पसंद नहीं करते| ऐसे लोग खुद को महा ज्ञानी समझते हैं और नए जमाने को, नई पीढ़ी को बात बात पर खराब बताते हैं|
satyamshiwamsundaram.blogger.com: लोकतंत्र में जाति धर्म
satyamshiwamsundaram.blogger.com: नफरत के बीज
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सोमवार, 22 अक्टूबर 2018
नफरत के बीज
गांधी नेहरू सुभाष भगत ... ... .. सबके रास्ते अलग अलग थे लेकिन मंजिल एक थी|
ये गांधी सुभाष को लड़ाने वाले तब अपनी खिचड़ी अलग पका रहे थे झूठ अफवाह के सहारे नफरत के बीज तैयार कर रहे थे|
लोकतंत्र
रोशन अग्रवाल, विजय अग्रवाल, उमेश अग्रवाल, डॉ राजू अग्रवाल...
मतलब अग्रवाल लोग एकजूट नहीं हैं|
होना भी नहीं चाहिए|
लोकतंत्र में जाति धर्म आधारित वोटिंग नहीं होनी चाहिए|
किसी भी जाति समाज में किसी एक उम्मीदवार के लिए सर्वसम्मति नहीं हो सकती|
होना भी नहीं चाहिए| लोकतंत्र में jati dharm आधारित वोटिंग नहीं होनी चाहिए|
जाति धर्म नहीं योग्यता देखकर वोट देना चाहिए|
शनिवार, 20 अक्टूबर 2018
हिंदू धर्म
मनु जी के चार वर्णों ब्राह्मण क्षत्रीय वैश्य शुद्र में से ब्राह्मणों द्वारा रचित वेद पुराण स्मृति को हम हिंदू धर्म मानते हैं| लेकिन हमारे देश के सुप्रीम कोर्ट के अनुसार हिंदू कोई धर्म नहीं है| यह एक संस्कृति है|
जानकार लोग कृपया हिंदू धर्म क्या है? इसकी जानकारी दें|
ईश्वर की खोज
पृथ्वी कैसे बनी, ब्रह्मांड को किसने बनाया? उसका नियमित संचालन कौन करता है? जीवन प्राण कौन देता है? कौन लेता है? मृत्यु के बाद क्या होता है?
इन्हीवअनुत्तरित प्रश्नो के जाबाब के लिए ईश्वर भगवान खुदा अल्लाह गॉड की खोज की गई| इससे मन शांत हो जाता है| सब कुछ वही करता है उसी की मर्जी से होता है ऐसा मान लेने से मन की उद्वीग्नता कम हो जाती है| मन की शांति के लिए यह मनोवैज्ञानिक इलाज है जो माने उसके लिए| जो न माने वह किसी बड़ी दुर्घटना की क्षति को सोच सोच कर अशांत रह सकता है परेशान रह सकता है वर्षों तक या जीवन भर| हो सकता है उस पीड़ा को नहीं झेल पाने से वह पागल हो जाय|
शुक्रवार, 19 अक्टूबर 2018
लोकतंत्र में राजनीति
राजतंत में आम जन को राजनीति से दूर रखा जाता था| लोकतंत्र में हर वयस्क नागरिक से अपेक्षा की जाती है कि वह राजनीति से जुड़े| वोट देना भी राजनीति से जुड़ना है|
वोट मांगना ही राजनीति नहीं, वोट देना भी है|
वोट और स्वार्थ
किसी भी जाति समाज के नेताओं के द्वारा अपने पद और अपने संगठन से जुड़े लोगों की संख्या बताकर वोट दिलाने का आश्वासन देकर किसी राजनैतिक दल से रकम लेना बहुत घटिया काम है| ऐसे स्वार्थी नेताओं को समाज में कोई पद नहीं देना चाहिए|
किसी जाति समाज द्वारा समाज के लोगों से किसी को वोट देने के लिए अपील नहीं करना चाहिए| इसके लिए कोई नियम आदोश निर्देश जारी करना उचित नहीं|
सब कुछ पूर्व निर्धारित
हमारे हिंदू धर्म के अनुसार जो भी होता है पूर्व निर्धारित होता है| याने भगवान द्वारा तय होता है| बाढ़ भूकम्प, युद्ध, दंगे फसाद, हत्या चोरी डकैती, बलात्कार, भ्रष्टाचार... सब कुछ.. यह भी कोई पत्ता हिलता हो तो वह भी उपर वाले की मर्जी से . सब
कुछ वही करता है| गजब है यह मान्यता|
कोई इसे बकवास कहे तो उनकी धार्मिक आस्था को चोट लगेगी| और इन मान्यताओं के प्रचार प्रसार से हमारी वैज्ञानिक आस्था को चोट लगेगी उसका क्या?
बुधवार, 17 अक्टूबर 2018
भारतवर्ष का पुराना संविधान
भारतवर्ष का पुराना संविधान _
***"*************कॉपी पेस्ट संकलित है| यदि कुछ गलत हो तो कृपया सही सही बताएं|
1 - यह जो ब्राम्हण, क्षेत्रीय, वैश्य व शूद्र जो विभाजन है वह मेरा द्वारा ही रचा गया है।
- गीता 4-13
2 - मेरी शरण में आकर स्त्री ,वेश्य , शूद्र भी जिन कि उत्त्पति पाप योनि से हुइ है परम गति को प्राप्त हो जाते है। भगवत गीता 9-32
3 - शूद्र का प्रमुख कार्य तीनो वर्णो की सेवा करना है।
- महाभारत 4/50/6
4 - शूद्र को सन्चित धन से स्वामी कि रक्षा करनी चाहिये। - महाभारत 12/60/36
5 - शूद्र तपस्या करे तो राज्य निर्धनता में डूब जायेगा।
- वाo .रामायण 7/30/74
6- ढोल .गवार .शूद् पशु नारी |
सकल ताड़ना के अधिकारी ||
- रामचरित मानस 59/5
7- पूजिये विप्र सील गुन हीना, शूद्र न गुण गन ग्यान प्रविना।
-रामचरितमानस 63-1
8- वह शूद्र जो ब्राम्हण के चरणो का धोवन पीता है राजा उससे कर TAX न ले।
- आपस्तंबधर्म सूत्र 1/2/5/16
9 - जिस गाय का दूध अग्निहोत्र के काम आवे शूद्र उसे न छुये। कथक सन्हिता 3/1/2
10- शूद्र केवल दूसरो का सेवक है इसके अतिरिक्त उसका कोइ अधिकार नही है।
- एतरेय ब्राम्हण 2/29/4
11- यदि कोइ ब्राम्हण शूद्र को शिक्षा दे तो उस ब्राम्हण को चान्डाल की भाँति त्याग देना चाहिये।
- स्कंद पुरान 10/19
12 - यदि कोइ शूद्र वेद सुन ले तो पिघला हुआ शीशा, लाख उसके कान में डाल देना चाहिये।
यदि वह वेद का उच्चारण करे तो जीभ कटवा देना चाहिये। वेद स्मरण करे तो मरवा देना चाहिये।
गौतम धर्म शूत्र 12/6
13 - देव यज्ञ व श्राद्ध में शूद्र को बुलाने का दंड 100 पर्ण।
विष्णु स्मृति 5/115
14 - ब्राम्हण कान तक उठा कर प्रणाम करे, क्षत्रिय वक्षस्थल तक, वैश्य कमर तक व शूद्र हाथ जोड़कर एवं झुक कर प्रणाम करे।
आपस्तंब धर्म शूत्र 1,2,5,/16
15 - ब्राम्हण की उत्पत्ति देवता से, शूद्रो की उत्पत्ति, राक्षस से हुइ है।
तेत्रिय ब्राम्हण 1/2/6/7
17 - यदि शूद्र जप ,तप, होम करे तो राजा द्वारा दंडनिय है।
गौतम धर्म सूत्र 12/4/9
17- यज्ञ करते समय शूद्र से बात नहीं करना चाहिये।
शतपत ब्राम्हाण 3;1/10
18- जो शूद्र अपने प्राण, धन तथा अपनी स्त्री को, ब्राम्हण के लिए अर्पित कर दे ,उस शूद्र का भोजन ग्राहय है।
विष्णु पुराण 5/11
👉महाभारत"कहती है - शूद्र राजा नहीं बन सकता।
👉"गीता" कहती है - शूद्र को ब्राह्मण क्षत्रिय और वैश्यों की गुलामी करनी चाहिए ।
👉"रामायण" कहती है - शूद्र को ज्ञान प्राप्त करने पर मृत्युदंड मिलना चाहिए ।
👉"वेद" कहते है कि शूद्र ब्रह्मा के पैरोँ से पैदा हुआ है इसिलिये वो नीच है ।
👉"मनुस्मृति" के अनुसार - शूद्र का कमाया धन ब्राह्मण को बलात् छीन लेना चाहिए ।
👉"वेद" कहते है - शूद्र का स्थान ऊपर के तीनों वर्णों के चरणों में है।
मंगलवार, 16 अक्टूबर 2018
जगत का कल्याण
पद्ममुख पंडा_
बहुत से धर्माचार्य ईश्वर को अपना रक्षा कवच मानते हैं जिस दिन सिद्ध हो गया कि ईश्वर नहीं है उस दिन इनके आजीविका का माध्यम भी समाप्त हो जाएगा
कहते हैं कि ईश्वर अनुभव में होता है उसे देखने के लिए दिव्य दृष्टि चाहिए क्या ईश्वर नहीं चाहता कि संपूर्ण संसार उसे दिव्य दृष्टि से देखे पूरा विश्व खुशियों से भरा हो?
भ्रांतिपूर्ण स्थिति से उबरने के लिए बुद्धि व तर्क ही एकमात्र उपाय है इसी में जगत का कल्याण निहित है|
सोमवार, 15 अक्टूबर 2018
महा आश्चर्य
बहुत आश्चर्य!
हमारे देश में बहुत सारे लोग ईश्वर को जानते समझते हैं| यह भी सच है कि अधिकतर लोग भ्रष्टाचारी पापी अपराधी स्वार्थी हैं|
आश्चर्य
बहुत आश्चर्य|
मानते हैं ईश्वर सर्वशक्तिमान हैं| सम्पूर्ण ब्रह्मांड का संचालन करते हैं वे फिर भी हम उनके रहने बसने, खाने पीने की चिंता करते हैं| इस चिंता में हम मरते मारते भी हैं|
शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2018
पूजे अगर खेत के ढेले
रामधारी सिंह दिनकर_
उठ मंदिर के दरवाजे से,
जोर लगा खेतों में अपने|
पूजे अगर खेत के ढेले,
तो सचमुच कुछ पा जाएगा|
भीख या कि वरदान मांगता
पड़ा रहा तो पछताएगा||