स्मार्ट सिटी, बुलेट ट्रेन कुछ ही शहरों में| विदेशी वाह वाह करेंगे| हमारा अच्छा इमेज बनेगा विदेशों में
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
मंगलवार, 31 जनवरी 2017
स्मार्ट सिटी, बुलेट ट्रेन
स्मार्ट सिटी, बुलेट ट्रेन कुछ ही शहरों में| विदेशी वाह वाह करेंगे| हमारा अच्छा इमेज बनेगा विदेशों में
सोमवार, 30 जनवरी 2017
भ्रष्टाचार के संरक्षक
इसीलिए यह भ्रष्टाचार सर्वब्यापी हो गया है, दिनोदिन बढ़ता जा रहा है|
अन्ना जी जितना चिल्लाएं, अनशन करें; मोदी जी जितने छापे मारें इसका नाश बहुत मुश्किल है| यह तो घर - घर में, जन जन में विद्यमान है|
मतभेद
रविवार, 22 जनवरी 2017
धर्म और संविधान
तथाकथित धर्म वेद पुराण कुरान के नियम परंपराओं से हटकर भी संविधान में कुछ नियम कानून बनाए गए हैं|
तथाकथित धर्मऔर संविधान का एक साथ पूरा पूरा पालन संभव ही नहीं हैं|
इसलिए हमारा संविधान ही हमारा धर्म होना चाहिए|
वेद और नामकरण
गांधी जी को महात्मा, राष्ट्र पिता; नेहरू को चाचा, सरोजनी नायडू को भारत कोकिला, सुभाष चंद्र बोस को नेता जी.. ... ये सब नामकरण सरकार द्वारा नहीं किया गया है| लोग अपनी मर्जी से इस तरह का उपनाम जोड़ देते हैं| अगर किसी को इन नामों से आपत्ति जलन हो तो वे उपयोग न करें| साहित्यकार अपना उप नाम वेद से पूछकर नहीं स्वयं अपनी मर्जी से रखते हैं|
किसी का नामकरण वेद से पूछकर नहीं होता| हमारे देश का नामकरण भी नहीं| कौन कौन सा काम वेद अनुसार हो रहा है? देश की आजादी की लड़ाई वेद के अनुसार नहीं होने के कारण वेद के जानकारों ने उस लड़ाई में भाग नहीं लिए क्या? यह लोकतंत्र, चुनाव, शुद्रों के लिए स्कूल, ब्राह्मणों का नौकरी करना, छूआ छूत न मानना, .... यह सब वेद अनुसार हो रहा है क्या?
वेद को जो देखे भी नहीं वे गांधी को राष्ट्र पिता कहने से वेद का हवाला देकर आपत्ति कर रहे हैं|
बौद्ध, जैनी, आर्य समाजी, पं श्री राम शर्मा गायत्री शक्ति पीठ के अवुयायी.... क्या वेद को मानते हैं?
हम वेद को माने या नहीं यह हमारी मर्जी है| वेद को मानने के लिए हमारे संविधान में कोई कानून नियम नहीं बनाया गया है| हम हमारे संविधान को मानेंगे|
हमारा संविधान ही हमारा धर्म है|
रविवार, 15 जनवरी 2017
शनिवार, 14 जनवरी 2017
अंध भक्त दूर हों
जो अपनी बात सार्वजनिक मंच, सोशल मिडिया, प्रिंट मिडिया में कहने का साहस नहीं करते, केवल वाट्सएप ग्रुप के किसी मंच में कहते हैं वे निश्चित ही घटिया मानसिकता के हैं| ऐसे ही जलनखोर लोग कान कान में झूठ अफवाह फैलाने में माहिर होते हैं| ऐसा वे अपनी मूर्खता जलनखोरी और अंधभक्ति के कारण करते हैं|
ऐसे भक्त मुझसे दूर हो जांय, मेरे वाट्सएप ग्रुप "विचार मंच" मंच में भी न रहें|
बुधवार, 11 जनवरी 2017
मंगलवार, 10 जनवरी 2017
बड़ा दिमाग
दर असल ब्राह्मणों का दिमाग अपेक्षाकृत बड़ा होता है| पुराने जमाने में वे दूसरों को अध्ययन से वंचित रखने की कोशिश किए अपने हित में| उनके बताए मार्ग का लोग आंख बंद कर पालन करने लगे| आम जन के लिए स्कूल खोले गए अंग्रेज शासन काल में| लोगों के बंद दिमाग खुलने लगे| सोच विचार करने लगे| ब्राह्मणवाद का विरोध भी शुरू हो गया| लेकिन इसे ब्राह्मण परिवार में जन्मे लोगों का विरोध नहीं समझना चाहिए| क्योंकि आज वे हर तरह के कार्य कर रहे हैं मंत्री प्रशासक अधिकारी सैनिक अध्यापक व्यवसायी डॉक्टर इंजिनियर चपरासी.
गाली
Bramahan .... ko... gali..dena ..
..fashion ho...gaya
hay....
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ब्राह्मणवाद की आलोचना होती है, ब्राह्मण परिवार में पैदा होने वालों की नहीं|
यह कोई फैशन नहीं, लोगों के खुले दिमाग का परिणाम है|
रविवार, 8 जनवरी 2017
भावना को ठेस
वैज्ञानिक सोच के विरुद्ध कोई बात कहने से हमारी विज्ञान सम्मत भावना को ठेस पहुंचती है| सरकार, न्यायालय को हमारी भी चिंता करनी चाहिए|
बुधवार, 4 जनवरी 2017
अंतर
हिंदी साहित्य में रुचि रखने वालों से एक प्रश्न-
राजेंद्र यादव तथा राजेंद्र अवस्थी में गुण धर्म आधार पर अंतर बताइए|