हिंदू धर्म के मुताबिक_
सति प्रथा सही. विधवा विवाह गलत. शुद्र का अध्ययन अध्यापन करना, सैनिक, अधिकारी बनना गलत|
मुस्लिम धर्म के मुताबिक_
ब्याज लेना गलत| बुरका में रहना जरूरी|
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कट्टर भक्तों को चाहिए कि अपने धर्म के पुरानी परंपराओं नियमों को लागू कर,ें लागू कराने की कोशिश करें|
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
बुधवार, 28 दिसंबर 2016
धार्मिक कट्टरता
संस्कृति रक्षा
हा हा हा.. संस्कृति रक्षा के ठेकेदार पता नहीं और क्या क्या शुरू करेंगे|
वेलेंटाइन दिवस 14 फरवरी को मातृ पितृ दिवस|
क्रिसमस 25 दिसम्बर को तुलसी पूजन दिवस|
राज्य
तर्क आधार सहित अपना विचार व्यक्त करें| श्रीराम, श्रीकृष्ण, .. . किसके राज्य में प्रजा अधिक सुखी थी?
मंगलवार, 27 दिसंबर 2016
दिब्येन्द्रीय
कहते हैं पहले के ऋषि मुनी साधु संतों के कर्मेन्द्रीय ज्ञानेन्द्रीय सभी अंग दिब्य होते थे, अलौकिक अद्भुत क्षमतावान होते थे| क्या आज कोई दिब्येन्द्रीय/दिब्यांग हैं?
रविवार, 25 दिसंबर 2016
बुराई से डर
बुराई से डर कर भागना ठीक नहीं उसे दूर करने की कोशिश करनी चाहिए|
ब्याप्त बुराइयों के कारण जाति समाज देश दुनियाँ या धर्म को छोड़ने का निर्णय उचित नहीं है|
शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016
धोखा
धोखा- -
किसी ने मेरे एक मित्र डॉ एस एस गुप्ता जी को एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कहा| बताया " कार्यक्रम शिक्षा से संबंधित है| शिक्षा में रुचि रखने वाले आप लोगों को अवश्य जाना चाहिए|
मित्र के कहने से मैं निर्धारित तिथि को रायगढ़ के रेड क्वीन में समय पर उपस्थित हो गया| कई युवक युनिफार्म में आगंतुकों का स्वागत कर रहे थे|मेरे मित्र को मेसेज किया कि मैं पहुँच गया हूँ| हाल के अंदर मुझे बैठाया गया|
कुछ देर बाद घोषणा हुई - हमारी कंपनी आपके फायदे के लिए आपके शहर में काम शुरू करने जा रही है| आप सब को कंपनी के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए पधार रहे हैं मिस्टर अबस | आप लोग उनके स्वागत में खड़े हो जाएं, जोरदार तालियां बजाइए| सब खड़े होकर ताली बजाने लगे|
मुझे अजीब लग रहा था| मैं क्यों खड़ा होता| क्यों स्वागत करता| मैं खड़ा नहीं हुआ, चुपचाप बैठा रहा|
खैर वे मंचासीन हुए| उन्हें तालियों की गड़गड़ाहट के बीच बड़ा सा फूल माला पहनाया गया|
माइक लेकर मिस्टर अबस ने कहा-
आप सबका मैं अभिनंदन करता हूँ| मैं जानता हूँ आपका शहर उर्जावान है| रायगढ़ के युवा बहुत उर्जावान हैं|
पीछे से तालियों की गड़गड़ाहट|
है कि नहीं?
पीछे से आवाज - हाँ हम उर्जावान है्ं|
वे दोनो हाथ उपर नीचे 180, 90, 45 अंश में घुमा रहे थे| मुझे हमारे देश के एक बड़े नेता के भाषण देने की स्टाइल याद आ रही थी|
पीछे से तालियों की गड़गड़ाहट|
है कि नहीं! बोलिये|
पीछे से आवाज- हां हैं|
मैं यह भी जानता हूं कि आप सब कुछ करना चाहते हैं| बड़ा आदमी बनना चाहते हैं| है कि नहीं?
पीछे से आवाज - हाँ हम बड़ा बनना चाहते हैं|
तो हम आपको बहुत धनी बनाना चाहते हैं| बोलिए बनना चाहते हैं?
पीछे से आवाज- हां हम धनी बनना चाहते हैं|
मैं परेशान हो रहा था| कहां फँस गया| मुड़कर देखा पूरा हाल भरा था| पीछे कुछ लोग युनिफार्म में खड़े थे जो बीच बीच में में ताली बजा रहे थे | उत्साहित करने के लिए समवेत स्वर में जी हां जी हां बोल रहे थे|
अब मैं झेल नहीं सका| हेलमेट उठाया, बाहर चला आया| पीछे बैठे थे मेरेे मित्र | वे भी मेरे पीछे पीछे बाहर आ गए|
किसी कहने से पहली बार मेरा समय बरबाद हुआ| बहुत अखर रहा था|
हमारे गाँव लोइंग के रविवारीय स्वाध्याय केंद्र का समय हो रहा था जहां हम सेवा निवृत शिक्षक कर्मचारी निःशुल्क ट्यूशन पढ़ाते हैं प्राथमिक माध्यमिक विद्यार्थियों को| हम दोनो मित्र बिना चाय नास्ता किए सीधे लोइंग पहुँचे स्वाध्याय केंद्र में|
गुरुवार, 22 दिसंबर 2016
युवाओं से उम्मीद
अपने विऱोधी विचार को भी सुनना पढ़ना चाहिए| सोच समझकर तर्क आधार युक्त अपनी राय देनी चाहिए|
लेकिन ऐसा लकीर के फकीर नहीं कर सकते| वे तो सुनेंगे ही नहीं| क्योंकि वे महा ज्ञानी होते हैं|
युवा वर्ग से उम्मीद की जाती है क्योंकि वे जिज्ञासु होते हैं सब कुछ जानना चाहते हैं|
Following
किसी के सम्पूर्ण गुण धर्म का follow करना संभव नहीं है| एक या एकाधिक गुण का follow कर हम उनके Follower हो सकते हैं| मैं गांधी, नेहरू, इंदिरा, अटल, मोदी जी ...... का follower हूँ|
लेकिन मैं किसी का भक्त नहीं हूँ|
बुधवार, 14 दिसंबर 2016
Universal?
भगवान ईश्वर अल्लाह खुदा गॉड देवी देवता भूत प्रेत सब सार्वभौनिक universal क्यों नहीं होते?
मंगलवार, 13 दिसंबर 2016
ताला और आस्था
आस्तिकों की आस्था संदिग्ध| ईश्वर की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता तो ताला ही क्यों लगाते हैं?
प्रभु इच्छा
कहते हैं धर्म भक्ति आस्था की कमी के कारण समाज का पतन हो रहा है|
यह प्रभु की इच्छा से ही हो रहा होगा फिर क्या चिंता?
रविवार, 11 दिसंबर 2016
फांसी गोली
रैली आंदोलन करने वालों को किसी कानून में फांसी नहीं हो सकती| बाबा रामदेव, अन्ना, केजरीवाल को सरकार का विरोध करने से फांसी होगी क्या? फिर आजादी के आंदोलन के लिए गांधी नेहरू या अन्य कांग्रेसियों को फांसी गोली क्यों मिलती?
शनिवार, 10 दिसंबर 2016
भक्ति और श्रद्धा
यज्ञ हवन पूजा पाठ में भक्ति होती है, स्वार्थ होता है, कुछ मांग होती है भगवान देवी देवताओं से| महात्मा गांधी की समाधि पर कोई श्रद्धा सुमन अर्पित करे, प्रणाम करे तो वह स्वार्थ नहीं, कोई मांग नहीं केवल श्रद्धा होती है|
भक्ति ओर श्रद्धा में बहुत अंतर है|
शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016
आस्तिक का अर्थ
कहा जाता है कि जो वेद को नहीं मानता वह नास्तिक है|
लेकिन मेरे विचार से .. सः अस्ति याने भगवान है ऐसा मानने वाला आस्तिक है| सः न अस्ति = सः नास्ति याने भगवान नहीं है ऐसा मानने वाला नास्तिक है|
आस्तिक नास्तिक
प्रचलित धर्मों का विरोध करता हूँ या पूजा पाठ नहीं करता| इसका मतलब यह नहीं कि मैं नास्तिक हूँ|
मैं भगवान को जानता समझता नहीं, इसलिए फिलहाल आस्तिक नहीं हूँ| जिस दिन मैं जान गया वह है, तो आधा अधूरा नहीं शत प्रतिशत आस्तिक हो जाऊंगा|
धर्म और संविधान
अपने अपने संविधान और अपने धर्म की आलोचना कर आवश्यक सुधार करना चाहिए| दूसरे की आलोचना आवश्यक नहीं|
देश काल परिस्थिति अनुसार संशोधन परिवर्तन होना चाहिए| यदि धर्मों में भी संशोधन होते रहें तो अंत में वह होगा हमारे देश का संविधान|
गुरुवार, 8 दिसंबर 2016
प्यार
कब तक शव ममियों का मस्का लगाते टाईम पास करें|
इतनी बड़ी दुनियां इतने सारे लोग आओ सबसे प्यार करें|
एकमत
कहते हैं उपर वाले की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता| तो ये उपर में रहने वाले अल्लाह भगवान.. सभी किसी पत्तीको हिलाते समय एकमत होते हैं?
मोदी जी
ब्रह्मचारी जी शक्तिशाली हैं, उत्साही हैं| कुछ नया करने की इच्छा बलवती है| भारत स्वछता अभियान. शौचालय निर्माण, अब नोटबंदी| आगे आगे देखिए होता क्या है|
अलग अलग भगवान
अगर भगवान अल्लाह सब एक ही हैं तो उनके बताए रास्ते भी एक ही होना चाहिए| हिंदू मुस्लिम सब अलग अलग क्यों?
बुधवार, 7 दिसंबर 2016
विरोध
मैं मोदी का जी विरोध करूं तो कांग्रेसी न समझें, कल उनका भी विरोध करूंगा| अम्बेडकर जी की प्रशंसा करता हूं लेकिन बाबावादी या जय भीम वाला नहीं हूँ|
मंगलवार, 6 दिसंबर 2016
दिमाग का उपयोग
आम तौर पर युवा वर्ग लकीर के फकीर नहीं होते| कुछ ही होते हैं जो बिना सोच विचार किए मान लेते हैं| वे अपने दिमाग का कम उपयोग करते हैं|