समाज के लिए बनाए गए नियम धर्म कहलाता जिसका धारण (पालन) करना चाहिए| उसमें देश काल परिस्थिति अनुसार संशोधन परिवर्तन होते रहना चाहिए जैसा कि संविधान| जिसमें परिवर्तन नहीं वहां गति नहीं| जिसमें गति नहीं वह जीवंत नहीं मृत हो जाता है|
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
रविवार, 30 अप्रैल 2017
शनिवार, 29 अप्रैल 2017
श्रीकृष्ण
श्रीकृष्ण जी उस जमाने के most intelligennt थे| बहुत सारी लड़कियां उनसे प्रेम करती थीं| कृष्ण जी सबसे प्रेम करते थे| he was best lover.
इसमें आलोचना की कोई गु्ंजाईश नहीं|
कृष्ण की 8 ही पत्नियां थीं यथा- रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा।
उस जमाने में एकाधिक विवाह करने का रिवाज था| क्योंकि बहुत युद्ध होने के कारण पुरूषों की संख्या कम थी|
उस समय विवाहेत्तर प्रेम को समाज बुरा नहीं मानता था| प्रेमिका को कभी पत्नी का दर्जा नहीं मिलता | इसलिए श्रीकृष्ण की 16008 पत्नियां थीं कहना गलत है| आठ के अलावा बाकी सब प्रेमिकाएं थीं| कृष्ण जी के शानदार व्यक्तित्व के कारण बाद में भी मीरा उन्हें पति मानने लगी| आज भी कई लड़कियां खुद को उनकी प्रेमिका/ पत्नी मानती हैं| उनमें से कई शादी भी नहीं करतीं|
एकाधिक विवाह
पहले युद्ध बहुत होते थे| सैनिक मारे जाते थे| फलस्वरूप. पुरुष की अपेक्षा स्त्रियों की संख्या अधिक होती थी| समायोजन के लिए पुरुष को एकाधिक शादी करने की छूट थी| मुस्लिम अब भी उसे बनाए रखना चाहते हैं|
शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017
क्रूर बनाम मानवतावादी
भगवान को मानने वाल कई लोग अपराध करते हैं खूब बाद में मंदिरों में पाप मुक्ति के लिए खूब चढ़ावा देते हैं| भगवान को नहीं मानने वाले मानवतावादी होते हैं| कट्टर धार्मिक क्रूर सहिष्णु होते हैं आतंकवादी होते हैं धर्म के नाम पर हत्या करते हैं|
रविवार, 23 अप्रैल 2017
कल पुस्तक दिवस था| याद आ रहे हैं
कलवपुस्तक दिवस था| याद आ रहे हैं_
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उपन्यास-
प्यारे लाल अवारा, गुलशन नंदा,
कुशवाहा कांत, वेद प्रकाश काम्बोज, वेद प्रकाश शर्मा, ... .
सुरेन्द्र मोहन पाठक, ओम प्रकाश शर्मा,
इब्ने सफी बी ए, कर्नल रंजीत, मीना सरकार. हेडली चेईस, ....
वी वहानवी, मस्त राम, ...
बंकिम चन्द्र, रवीन्द्र नाथ, धर्मवीर भारती, रांगेय राघव, जयशंकर प्रसाद, कृष्ण चंदर, जैनेन्द्र कुमार, भगवती चरण वर्मा, प्रेम चंद, राहिल सांकृत्यायन, राजेन्द्र यादव, चतुरसेन शास्त्री, अमृत लाल नागर, विमल मित्र, ... ..
पत्र पत्रिका_
साप्ताहिक ब्लीट्ज,
कल्याण, अखंड ज्योति, दिव्य ज्योति,
धर्म युग, साप्ताहिक हिंदुस्तान, सारिका,
नुतन पुरातन ज्ञान विज्ञान ...की पत्रिका नवनीत ( भारती भवन से समन्वित से पहले), सरिता, मुक्ता,..
मंगलवार, 18 अप्रैल 2017
लाउड स्पीकर
Loud speaker पे अजान भी बंद हो ,भजन भी बंद हो ,गुरुद्वारा से गुरुवाणी भी बंद हो .....
secularism का मतलब किसी भी धर्म की कोई भी मूर्खता जो नागरिक धर्म का उल्लंघन हो, उसे किसी हालात मॆं इजाजत ना हो ।
चार दीवारों के अंदर , .....बाहर आवाज़ न जाये इस तरीके से जिसे अजान ,भजन कूछ भी और 365*24*7 करने हो तो खुशी से करे ।
धेट इज आल
सोमवार, 17 अप्रैल 2017
धर्म का संशोधित रूप संविधान
जिसका धारण करना अर्थात पालन करना अनिवार्य होता था उसे धर्म कहते थे|| लेकिन देश काल परिस्थिति अनुसार परिवर्तन संशोधन होना चाहिए| अब हमारा धर्म हमारा संविधान होना चाहिए|
गुरुवार, 13 अप्रैल 2017
भीमराव अम्बेडकर को नमन
भीमराव अम्बेडकर को नमन | वे दलितों के नहीं थे हम सबके थे| हमारा संविधान किसी एक वर्ग का नहीं हम सबका है | संविधान ही हमारा धर्म होना चाहिए| संविधान निर्माण करने वालों को नमन | संविधान को मान्य करने वाले सांसदों को नमन |
सोमवार, 10 अप्रैल 2017
गंगा नदी
कुछ चालाक लोगों ने गंगा नदी को पाप नाशिनी मोक्ष प्रदायिनी माता बनाकर उसे पवित्र बना दिया| फलस्वरूप वह स्वच्छ नहीं रह गया|
हमारा संविधान महान
हमारा संविधान सभी धर्मों के नियम परम्पराओं के विरुद्ध होते हुए भी महान है| जिन्होंने इसका निर्माण किया, मान्यता दी वे निश्चित ही महान हैं|
रविवार, 9 अप्रैल 2017
भारत की जय
यदि संविधान में यह "भारत माता की जय" राष्ट्रीय नारा घोषित हो या कानून बना दिया जाय बोलने के लिए तब तो बोलना ही पड़ेगा | तब तक भारत की जय |
ईश्वर का जन्म
दरअसल जब संसार का रहस्य कुछ भी समझ में नहीं आया तो ईश्वर की कल्पना की गई| यही उनके जन्म की सच्ची कहानी है|
ईश्वर की सत्ता को मान लेने से सारे प्रश्न.. जन्म मृत्यु जीवन ...समाप्त हो जाते हैं| मन शांत हो जाता है|
शनिवार, 8 अप्रैल 2017
धर्म के परिणाम
विभिन्न धर्मों के परिणाम - ईश्वर अल्लाह गॉड देवी देवताओं को पटाने की कोशिश में हम मनुष्य मनुष्य से दूर होते गए|
शुक्रवार, 7 अप्रैल 2017
गौदान
मरने के बाद आत्मा को गाय की पूँछ पकड़ कर वैतरणी नदी पार करना पड़ता है| आत्मा को तैरना नहीं आता| बाम्हन को एक गाय दान में चाहिए|
मन की शांति के लिए उपाय
मन की शांति के लिए कुछ सरल सुलभ प्रचलित उपाय हैं .
घर परिवार दुनियाँदारी से दूर हो जाना|
1_. कम समय के लिए- मंदिर मस्जिद चर्च, पूजा पाठ, भजन कीर्तन, सत्संग प्रवचन कथा सुनना, ...
2_. कोई नशा शराब गांजा....
३_.अधिक समय के लिए- बाबा बन जाना
क्या जरूरत है
ये पूजा पाठ भजन कीर्तन यज्ञ हवन नमाज प्रार्थना हमारे समाज से बुराइयों को दूर नहीं कर सकते तो इसकी जरूरत क्या है?
पाप मुक्ति के साधनों का आविष्कार
हमारे देश में लगभग सभी लोग धार्मिक आस्थावान पूजा पाठ यज्ञ हवन भक्ति भजन कीर्तन करते हैं फिर भी भ्रष्टाचार अपराध चोरी डकैती मार काट बलात्कार बढ़ रहे हैं लगातार...
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हमारे सारे पाप से मुक्ति के सरल सुलभ उपाय ब्राह्मणों द्वारा आविष्कार किए गए हैं| परिणाम
हमारे देश में भ्रष्टाचार अपराध चोरी डकैती मार काट बलात्कार बढ़ रहे हैं लगातार...
गुरुवार, 6 अप्रैल 2017
ग्रह दशा
ललित दार्शनिक _
अमेरिका और रूस जैसे देश दूसरे ग्रहों पर जीवन या फ़िर जीवन बचाने के लिये पृथ्वी जैसा दूसरा ग्रह ढूँढ़ने की कोशिश में रात -दिन एक किये हुए हैं वहीँ दूसरी तरफ़ हम अँगूठी में लगे पत्थर के द्वारा उन्हीं ग्रहों की दिशा बदलने में लगे हुए हैं l
पृथ्वी स्थिर है शेषनाग के सर पर
धार्मिक ग्रंथ के अनुसार शेषनाग के सर पर पृथ्वी स्थिर है. सूर्य पूर्व से पश्चिम की ओर प्रति दिन यात्रा करता है|
जो अपने दिमाग का उपयोग न करें. वे स्वीकार कर लेगा लेकिन गेलिलियो नहीं|.
बुधवार, 5 अप्रैल 2017
नास्तिक स्वतंत्र होता है
नास्तिक स्वतंत्र होता है अपनी बुद्धि का प्रयोग करता है| वह किसी ग्रंथ से बंधा नहीं होता|
जो होता है अच्छा होता है|
P.M.Panda Mahapalli_
कहा जाता है कि जो भी होता है अच्छे के लिए होता है। पर आजकल जो घृणित घटनाएँ होती हैं क्या वह किसी अच्छे के लिए है? चार साल की बच्ची के साथ बलात्कार?फिर उसकी हत्या??
ये जो पहले से बनाकर रखी गई अवधारणाएं हैं निहायत ही घटिया व बकवास हैं।
मंगलवार, 4 अप्रैल 2017
धार्मिक ग्रंथों से शिक्षा
कहते हैं धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने से कुछ न कुछ शिक्षा मिलती है| इन ग्रंथों का इतना ही महत्व है तो ...
बालीवुड की सभी फिल्मों से कुछ न कुछ शिक्षा मिलती है| बस कुछ सोचने समझने की बात है|
वैसे ही इसी तरह बहुत सारे लेखकों के कथा उपन्यास भी ह क्या इन्हें धार्मिक ग्रंथ का दर्जा दिया जा सकता है?
प्यारे लाल अवारा, गुलशन नंदा,
कुशवाहा कांत, वेद प्रकाश काम्बोज, वेद प्रकाश शर्मा, ... .
सुरेन्द्र मोहन पाठक, ओम प्रकाश शर्मा,
इब्ने सफी बी ए, कर्नल रंजीत, मीना सरकार. हेडली चेईस, ....
वी वहानवी, मस्त राम, ...
बंकिम चन्द्र, रवीन्द्र नाथ, धर्मवीर भारती, रांगेय राघव, जयशंकर प्रसाद, कृष्ण चंदर, जैनेन्द्र कुमार, भगवती चरण वर्मा, प्रेम चंद, राहुल सांकृत्यायन, राजेन्द्र यादव, चतुरसेन शास्त्री, अमृत लाल नागर. ... ..
सम्पूर्ण विश्व के लिए एक धर्म एक संविधान
यः धारयति सः धर्मः| जो धारण करने योग्य हो या धारण करते हैं वह धर्म है|
कुरान, मनु स्मृति, गीता रामायण में बताई गई हर बात/ नियम को क्या पालन करना/मानना संभव है? क्या आप ऐसा करते हैं?
(मैं केवल नमाज अदा करना, पूजा पाठ भक्ति की बात नहीं कर रहा)
धर्मों में बताई/ कही गई बातों के विपरीत भी हैं हमारे संविधान के नियम कानून|
विशिष्ट वर्ग द्वारा समाज के लिए बनाए गए विभिन्न धर्मों के नियमों को आज का शिक्षित वर्ग समाज के हित में मानने को तैयार नहीं है| इसी लिए लोकतंत्र द्वारा राष्ट्र के हित में सम्पूर्ण समाज के लिए नए नियम कानून बनाए गए जो संविधान कहलाता है|
आज का संविधान राष्ट्र के सम्पूर्ण समाज के हित में सभी धर्मों का संशोधित परिवर्तित रूप है|
लेकिन कई लोग वर्तमान संविधान के साथ साथ धर्मों के पुराने नियमों को भी पालन करना चाहते हैं | जबकि पूरा पूरा पालन करना संभव नहीं है|
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कुछ लकीर के फकीर धर्म में कोई परिवर्तन संशोधन पसंद नहीं करते| धार्मिक नियमों के विपरीत कोई नियम कानून संविधान में भी बनता है तो उसका विरोध करते हैं| उनका वश चले तो धार्मिक नियमों परंपराओं को यथावत संविधान में रख लें|
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बेहत्तर है सभी धर्मों का विसर्जन कर अपने अपने संविधान का पालन करें|
उम्मीद करें भविष्य में सम्पूर्ण विश्व के लिए एक संविधान हो|
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जय जगत|
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सोमवार, 3 अप्रैल 2017
खाली दिमाग
गलत कहते हैं खाली दिमाग शैतान का घर?
दिमाग में कचरा भरा हो तो नई बात कहाँ से घुसेगी| लकीर के फकीरों का दिमाग खाली नहीं रहता|
धर्म ने क्या दिया
बड़े आये आहत होनेवाले धर्म के नाम पर ! और कितना टाइम चाहिए ?
धर्मों ने क्या दिया हमको ? हमने तो उनको पांच हज़ार साल और चौदह सौ साल दिए ! फिर भी वही युद्ध, वही कुपोषण, वही गरीबी, वही रोग और बीमारियां, वही मुट्ठी भर लोगों का राज, वही औरतों की ग़ुलामी , वही जाति-व्यवस्था, वही प्रकृति का अंधाधुंध नाश ! आप दोनों पंडित-मुल्ला के फेरे में हम रहे तो पांच हज़ार साल बाद लौट कर भी यही देखेंगे। वही युद्ध, गरीबी और रोग-बलाय और आपलोगों का बजता हुआ रिकॉर्ड, "मेरा धर्म बनाम तुम्हारा धर्म !"
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रविवार, 2 अप्रैल 2017
धर्म का दुश्मन शिक्षा और विज्ञान
धर्म हमेशा शिक्षा और विज्ञान से नफरत करता है. क्योकि उसे पता है "क्यों का जबाब / कारण " और ज्ञान उसके जादुई सोच के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार हैं, जो एक दिन उसे खत्म कर देंगे.!
विरोधाभास
धार्मिक नैतिकता का विरोधाभास !
भारत के करोड़ों हिन्दू भक्ति ,पूजा ,प्रार्थना ,तीर्थयात्रा और साधु सेवा में कभी आंच नहीं आने देते ,परन्तु नित्य जीवन मैं नैतिक एवं अन्य अपराध करने से बाज़ नहीं आते। यदि देशभर के जेलों मैं विभिन्न अपराधों के कारण बंद अपराधियों का सर्वेक्षण किया जाये तो ९९ प्रतिशत कैदी विभिन्न धर्मों के कटर अनुयायी मिलेंगे जो जेल मैं भी अपने अपने धरम और उस के रीति रिवाज का पालन कर रहे हैं. उनसभी को पूरा विश्वास है कि अपराध कैसा भी हो,भगवानजी की आराधना एवं तुष्टिकरण से न केवल पापों से मुक्ति मिलती है वरन मरने के पश्चात दूसरे संसार मैं सुख सुविधा का अग्रिम प्रबंध हो जाता है. भगवानजी हमारे अपने आत्मीय हैं और हम उनसे कुछ भी नहीं छुपाते -वह हमारे राज़दार हैं पालनहार हैं।
युवाओं से
जो लकीर के फकीर नहीं बनना चाहते खास कर
युवा वर्ग के लिए_ ****
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लकीर के फकीर कुछ चालाक और स्वार्थी लोग नहीं चाहते कि नई पीढ़ी के दिमाग खुले हों|
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जो बिना सोचे समझे दूसरों की हाँ में हाँ मिलाते हैं, लिखी हुई या सुनी हुई बात को बिना विचारे स्वीकार कर लेते हैं वे अपने दिमाग का उपयोग नहीं करते|
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उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ो| इतिहास विज्ञान खूब पढ़ो| पढ़ कर सुन कर सोच विचार करो|
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हर बात पर प्रश्न करो| क्या? क्यों? कैसे?
सबसे महत्वपूर्ण है क्यों???
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जिनके पास कोई तर्क आधार युक्त जबाब नहीं होता वे गाली देने लगते हैं|
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जो इंटेलिजेंट होते हैं वे लकीर के फकीर नहीं हो सकते| वे विद्रोही होते हैं|
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दिमाग खुली रखो| तर्क करो| आधार सहित जबाब दो| जबाब न हो तो गाली मत दो|
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जो डिबेट पसंद नहीं करते वे सच जानना नहीं चाहते या जान बूझकर सच को उजागर होने देना नहीं चाहते |
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