कुरान, मनु स्मृति तब के संविधान थे जिसे धर्म कहा गया ।
ये धारयति से धर्मः। जो धारण करने योग्य हो, जिसे धारण करें वह धर्म है।
उनमें देश काल परिस्थिति अनुसार आवश्यक संशोधन नहीं किया गया । फ़लस्वरूप ये खत्म हो रहे हैं ।
अब तो हमारा संविधान ही हमारा धर्म है।