छत्तीसगढ़ में ओड़िया भाषी कुछ लोग अपने बच्चों को ओड़िया भाषा से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं|
अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने वाला आपका बच्चा अपनी मातृ भाषा या राष्ट्र भाषा में ठीक से बात नहीं कर सकता या नहीं समझ सकता तो यह गर्वित होने की नहीं लज्जित होने की बात है|
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
गुरुवार, 30 मई 2019
मातृ भाषा का महत्व
मंगलवार, 28 मई 2019
अयोध्या में राम मंदिर
अयोध्या में मस्जिद के पास ही राम जी का मंदिर, कोप भवन जानकी रसोई, दरबार.. मुझे याद आ रहे हैं 1981-82 में हम देखे थे । वह सब नहीं हैं क्या?
सोमवार, 27 मई 2019
एक नई पार्टी का गठन हो
कांग्रेस और अन्य सभी दलों को खत्म कर एक नया दल बनाना चाहिए जिसके उद्देश्य हो लोक कल्याण, वैज्ञानिक सोच। पद लोलूप लोगों को न रखें ।
साधु बाबा असामान्य
साधु बाबा लोग असमान्य होते हैं । इन्हें जंगल पहाड़ में रहना चाहिए । आबादी क्षेत्र में निषेध होना चाहिए ।
वोट देने का अधिकार नहीं होना चाहिए ।
गुरुवार, 23 मई 2019
मंगलवार, 21 मई 2019
आर्य और अनार्य
हमारे देश के मूल निवासी ST और OBC हैं ।आर्य बाहर से आये थे । वे मूल निवासियों को अनार्य कहते थे ।
ST को असुर कहते थे और OBC को राक्षस ।
ये मनु के किसी वर्ण में से नहीं हैं ।
कांग्रेस को खत्म कर नया संगठन बनाने का सलाह
गांधी जी के सलाह अनुसार कांग्रेसी "कांग्रेस"को खत्म कर नया संगठन "लोक सेवा दल" बना लेते। तो क्या फ़र्क पड़ता?
सोमवार, 20 मई 2019
कर्म अनुसार वर्ण
कर्म अनुसार वर्ण प्रचलित नहीं है जिस जाति के परिवार में पैदा होता है उसी जाति का माना जाता है कर्म अनुसार वर्ण मान्य होने से कथित शुद्र जाति के परिवार में जन्मे किसी अध्यापक को ब्राह्मण परिवार में जन्मे किसी अध्यापक लड़की के साथ शादी करने में कोई सामाजिक बाधा नहीं होगी । यह बहुत अच्छा होता लेकिन ऐसा होता नहीं है ।
भारत के मूल निवासी राक्षस
भारत के मूल निवासी हैं ST और OBC । ST जंगलों में रहते थे । मैदानी इलाकों में OBC रहते थे जो खेती करते थे । आज कल ST भी खेती करते हैं । भारत के मूल निवासियों को पुराणों में राक्षस कहा गया है ।
ये मनु के चार वर्णों में नहीं आते ।
गुरुवार, 16 मई 2019
समाज सेवा
यह समझ में नहीं आता की साठ बासठ के बाद लोगों को समाज सेवा, भजन कीर्तन, मंदिर मस्जिद, तीर्थ यात्रा, .... की कैसे सूझती है/ यह सब थोडा बहुत पहले से क्यों नहीं होता? कुछ लोग सेवा निवृत्ति पश्चात् पेंट शर्ट छोड़ कर धोती कुरता पहनते हैं, कोई दाढ़ी रखने लगते हैं/ परिवर्तन,,, ..?
एक शिक्षक अपनी सेवानिवृत्ति के अवसर पर बोले "मैं अब भागवत शरण में जीवन बिताऊंगा/ पता नहीं वे अब तक किसके शरण में थे?
शुक्रवार, 3 मई 2019
पूजा आरती की जरूरत नहीं है
मेरे विचार से सर्व शक्तिमान कथित ईश्वर या किसी देवी देवता को हमारी सेवा, पूजा, आरती (प्रशंसा गीत/मस्का) या भोग लगाने की जरूरत नहीं है|
बुधवार, 1 मई 2019
श्री कृष्ण जी
श्रीकृष्ण जी उस जमाने के most intelligennt थे| वे 16 कलाओं में पारंगत थे । याने hero. बहुत सारी लड़कियां उनसे प्रेम करती थीं| कृष्ण जी सबसे प्रेम करते थे| he was a great lover.
इसमें आलोचना की कोई गु्ंजाईश नहीं|
कृष्ण की 8 ही पत्नियां थीं यथा- रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा।
उस जमाने में एकाधिक विवाह करने का रिवाज था| क्योंकि बहुत युद्ध होने के कारण पुरूषों की संख्या कम हो जाती थी|
उस समय विवाहेत्तर प्रेम को समाज बुरा नहीं मानता था| प्रेमिका को कभी पत्नी का दर्जा नहीं मिलता | इसलिए श्रीकृष्ण की 16008 पत्नियां थीं कहना गलत है| आठ के अलावा बाकी सब प्रेमिकाएं थीं| कुछ सच में उनसे यमुना किनारे मिलती थी उनके बाँसुरी के धून का आनंद लेती थी, बाकी मन ही मन उनसे प्रेम करती थीं ।
कृष्ण जी के शानदार व्यक्तित्व के कारण बाद में भी मीरा उन्हें पति मानने लगी| आज भी कई लड़कियां खुद को उनकी प्रेमिका/ पत्नी मानकर किसी और से शादी नहीं करतीं|
हमारा धर्म हमारा संविधान
समाज के लिए बनाए गए नियम धर्म कहलाता जिसका धारण (पालन) करना चाहिए| उसमें देश काल परिस्थिति अनुसार संशोधन परिवर्तन होते रहना चाहिए जैसा कि संविधान| जिसमें परिवर्तन नहीं वहां गति नहीं| जिसमें गति नहीं वह जीवंत नहीं मृत हो जाता है|
हमारा संविधान ही हमारा धर्म|