शनिवार, 19 अगस्त 2023

परिवारवाद

परिवारवाद -
पहले 
चार वर्ण होते थे। तब परिवारवाद ही चलता था ।
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र ।
तब पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही तरह का पुश्तैनी काम करते थे । नई पीढ़ी बचपनसे ही अपने परिवार के बड़ों से काम सीखता और उसमें पारंगत हो जाता था ।

अब भी 
परिवारवाद चल रहा है लेकिन पहले से कम ।
किसान का बेटा किसान, शिक्षक का पुत्र पुत्री शिक्षक , व्यापारी का बेटा ब्यापारी...... किसी को कोई आपत्ति नहीं ।
लेकिन
राजनीति में परिवारवाद से हमें जलन होती है । 

शनिवार, 10 जून 2023

एकादश कर्म बनाम मृतक भोज

दश कर्म, एकादश कर्म के आयोजन का महत्व 
अपनों के साथ  दुख को share करना भी है ।
उस कार्यक्रम की तैयारी से लेकर कार्यक्रम सम्पन्न होते तक व्यस्तता तथा आगंतुकों से मिल कर बात चीत करने से वह पीडा कम होती जाती है ।
            दश कर्म और एकादश कर्म के दिन आगतुक मेहमानों के आतिथ्य सत्कार के साथ भोजन की व्यवस्था की जाती है जिसे मृतक भोज कहना गलत है। 
       हमारे इधर  मृतक भोज नहीं दी जाती । पहले किसी किसी क्षेत्र में मृतक भोज देने की परंपरा थी, शायद अब भी चलन में हो । इस में कई ब्राह्मणों को शुद्ध गाय घी से तले हुए विभिन्न मिष्ठान्न पुड़ी के साथ भोजन परोसा जाता है ।

भक्ति और आतंकवाद

अपने  धर्म ग्रंथ पढ़ कर बिना सोचे समझे 
उसे पूरा पूरा मान लेना ही भक्ति है  जो धार्मिक कट्टरता को जम्म देती है।  फिर आतंकवाद पनपता है ।

मंगलवार, 6 जून 2023

ST और OBC

ST और OBC 
मनु के चार वर्ण (ब्राह्मण क्षेत्रिय वैश्य शुद्र) 
में से किसी में नहीं हैं ।
यो ये ST, OBC कौन हैं? 

शुक्रवार, 26 मई 2023

स्वर्ग में reservation

सेवा निवृत्ति के बाद-
कुछ लोग 
पेंट शर्ट का त्याग कर सफेद कुरता पाजामा या धोती कुरता धारण करते है । लम्बी दाढ़ी रखने लगते हैं । धार्मिक सामाजिक संस्थाओं से जुड़ कर महा धार्मिक होने लगते हैं। रिश्वत भ्रष्टाचार से खुद को दूर कर लेते हैं ।
शायद स्वर्ग में वातानुकूलित सूट reserve कराने के लिए ।

बुधवार, 19 अप्रैल 2023

जयकारा

जयकारा.. 
जय भीम 
जय श्री राम 
जय ईशू 
अल्लाहो अकबर 
facebook में अपने post के उपर नीचे 
ये जयकारा देख कर ऐसा लगता है कि कोई विश्व युद्ध हो रहा है । प्रजा अपने राजा और उनकी सेना को motivate करने के लिए जयकारा लगा रहे हैं ।

रविवार, 16 अप्रैल 2023

संविधान सभा का औचित्य


हमारे देश का संविधान बाबा साहब का संविधान है ।
बाबा साहब ने संविधान लिखा ।
भारत के संविधान के निर्माता अम्बेडकर जी  थे ।
तो फिर 
संविधान सभा का क्या औचित्य था?

बुधवार, 5 अप्रैल 2023

स्वतंत्रता

नास्तिक स्वतंत्र होता है अपनी बुद्धि का प्रयोग करता है| वह किसी ग्रंथ से बंधा नहीं होता|

शुक्रवार, 31 मार्च 2023

मेरी बेवकूफ़ी

मेरी बेवकूफ़ी.. 
मैं छोटा था तब सोचता था कि भगवान और उनके पुजारी टट्टी पेशाब नहीं करते । एक दिन गाँव के पुजारी को टट्टी करने लोटा में पानी लेकर जाते देखा तब आश्चर्य हुआ । आश्चर्य  तो अब भी होता है पर पुजारी पर नहीं।

मंगलवार, 28 मार्च 2023

भ्रमित

ईश्वर को नहीं जानने वाले भ्रमित  confused  नहीं हैं |  भ्रमित तो वे हैं जो भगवान को जानते नहीं लेकिन मानते हैं |

सोमवार, 27 मार्च 2023

पूजा

लोगों से ये यह कहना कि.. 
हम तो रोज सुबह दो बजे जाग कर नहाते हैं. फिर पूजा करते हैं ।
       परिवार के सदस्यों को और भगवान को भी सोने नहीं देते, परेशान करते हैं।

आध्यात्म

आध्यात्म भ्रम जाल है।
इस चक्कर में न पड़ें तो अच्छा ।
हम मनुष्य हैं, मनुष्यता का ध्यान रखें बस ।

शुक्रवार, 24 मार्च 2023

आनंद दाता से ज्ञान?

हे प्रभु आनंद दाता ज्ञान हमको दीजिए|

अजीब है 
आनंद देने वाले से ज्ञान मांगोगे तो वे कैसे कहाँ से देंगे ?

गुरुवार, 23 मार्च 2023

कमी और वृद्धि

मानवता में कमी और धार्मिकता में वृद्धि हो रही है ।
मानवता और धार्मिकता में रखात्मक सह संबंध है ।

सोमवार, 6 मार्च 2023

खोज

कई साल भगवान और देवी देयताओं का address पता करने की कोशिश करता रहा , कोई नहीं मिले । फिर खोज बंद कर दिया।  बहुत समय बरबाद  कर दिया खोजने में ।

रविवार, 5 मार्च 2023

प्यार

इतनी बड़ी दुनियां
इतने सारे लोग
आओ सब से प्यार करें ।

खुश करने की कोशिश

कब तक शव ममियों को खुश करने की कोशिश करते रहें ?
वे सुनते ही नहीं ।
जीवित को खुश करें तो अच्छा है ।

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2023

Valentine’s Day

Love is indescribable 
 'Valentine’s Day' 
इतनी बड़ी दुनियां 
इतने सारे लोग 
आओ सब से प्यार करें ।

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2023

गीता का एक श्लोक

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत|
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहं युगे युगे|
(गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित) 
गीता के श्लोक को लिखने में  हम भूल कर सकते हैं|
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अभ्युत्थानम्=वृध्दि,उत्कर्ष
अधर्मस्य=पाप,धर्म के विपरीत कार्य
तद=तब
आत्मानं=स्वयं का
सृजाम्यहम=सृजन करता हूँ ।
        अतः होना चाहिए - "अभ्युत्थानम् धर्मस्य तदातत्मनं सृजाम्यहम् |
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सोमवार, 9 जनवरी 2023

अंतर्जातीय विवाह

महाभारत, रामायण काल में अंतर्जातीय विवाह होते थे| बाद में जातीय श्रेष्ठता के अहंकार में वृद्धि होने के कारण प्रतिबंधित किया गया|  अंतर्जातीय विवाह को भले ही प्रोत्साहन न दे  किंतु जाति समाज द्वारा अन्तर्जातीय विवाह करने वाले और उनके परिवार को प्रताड़ित दंडित करना उचित नहीं| समाज के इसी डर के कारण कई युवक युवती आत्म हत्या कर लेते हैं या जाति समाज द्वारा उनकी हत्या कर दी जाती है जिसे आनर किलिंग कहा जाता है| तब यह जानकर बहुत दुख होता है|
कोई जाति समाज किसी की शादी नहीं कराता तो उसे दंडित करने का अधिकार भी नहीं होना चाहिए|