गुरुवार, 30 जुलाई 2020

विवाह पश्चात सुखी जीवन

विवाह एक अलिखित समझौता है ।
विवाह पश्चात स्त्री पुरुष आपस में सुख दुःख के भागीदार होते हैं । एक दूसरे को  सुख देकर सुख प्राप्त किया जाता है । जितना देते हैं उससे ज्यादा मिलता है । यह आधिक्य स्त्री पुरुष दोनों पक्ष को मिलता है । यही सुखी जीवन होता है ।

मंगलवार, 28 जुलाई 2020

स्त्री

इज्जत चली जाती है सिर्फ़ स्त्री की ।
संदेह होता है सिर्फ़ स्त्री पर । 
परित्याग किया जाता है सिर्फ़ स्त्री का ।

Pornography


भारतीय संस्कृति रक्षा के लिए भारत में porn प्रतिबंधित किया। लेकिन सब कुछ लेकिन लेकिन हो रहा है । लगातार भाजपाइयों के porn video सोशल मीडिया में आ रहे हैं ।
  यह सब Pornography बंद होने के कारण हो रहे हैं,  बलात्कार भी इसी कारण बढ़े हैं ।
मनोवैज्ञानिक फ्रायड के अनुसार काम वासना का दमन करने से विकृत रूप धारण कर लेती है। काम की पूर्ति होना स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है । कामुक स्वप्न से भी सेक्स की पूर्ति होती है । 
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वयस्कों के लिये पोर्न फोटो वीडियो मूवी देखने की छूट होने से उनकी कामवासना की कुछ पूर्ति हो सकती है। इससे अवैध संबंधों और बलात्कार में कमी हो सकती है । 

सोमवार, 27 जुलाई 2020

भगवान पर भरोसा

आश्चर्य 
अधिकतर धार्मिक लोग भगवान पर आधा अधूरा विश्वास करते हैं । घर से बाहर निकलते समय और सोने के पहले main gate में ताला लगाकर दो बार जांच करते हैं ।

बहुत आश्चर्य 
मंदिर का पुजारी मंदिर में ताला लगाकर दो बार जांच करता है ।

रविवार, 26 जुलाई 2020

गुरु

वेतन लेकर पढाने वाला, स्कूल में केवल निर्देशित काम करने वाला शिक्षक होता है , जरूरी नहीं वह गुरू भी हो ।
जो बिना कोई पारिश्रमिक लिये दिशा दे/मार्ग दर्शन करे,  बौद्धिक विकास के लिए सहायता करे वह गुरू होता है। 
     कोई शिक्षक यदि सरकार द्वारा निर्देशित कार्य के अलावा विद्यार्थी को मार्गदर्शन करे, सहायता करे तो वह उसकी गुरूता होगी,  वे भी गुरू।

कान फूँका गुरु

कान फूँका गुरू -
      पुराने जमाने से परम्परा चली आ रही है किसी एक गुरु से कर्ण मंत्र लेकर गुरु बनाने का । वह गुरू स्कूल कालेज का शिक्षक नहीं होता, कोई अनपढ़ या प्रायमरी पास भी हो सकता है । ये गुरू नये चेले के कान में धीमी आवाज में एक दो पंक्ति का मंत्र सुनाते हैं ताकि कोई दूसरा सुन न ले । शंख घंट की तेज ध्वनि में जरूरी नहीं वह मंत्र चेला को सुनाई दे। कर्ण मंत्र लेकर शिष्य अपने गुरू को चरण स्पर्श कर प्रणाम करता है,  उपहार और दक्षिणा देता है । लोग  हर साल कम से कम एक बार अपने कान फूँका  गुरू को चढ़ावा देते हैं ।
      ये गुरू लोग (आजकल के स्कूल शिक्षक भी अपने चेलों भक्तों/ विद्यार्थियों को यह खूब सुनाते हैं) -
गुरू गोबिंद दोऊ खड़े हैं, काके लागूं पाँय|
याने अपनी महत्ता का बखान खुद करते हैं|
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             मैं किसी गुरू से कभी कोई कर्ण मंत्र नहीं लिया | कभी लूंगा भी नहीं|
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           मेरे स्कूल के सभी शिक्षकों में से एक शिक्षकमुझे बहुत याद आते हैं। श्री सोनसाय चौहान | उन्होंने मुझे कक्षा पाँचवीं से  उपन्यास कहानी पढने के लिए प्रेरित किया| वे मुझे पढने के लिए  उपन्यास, कहानी देते थे| उनकी प्रेरणा से मैं जीवन में हर तरह के हजारों उपन्यास कहानी पत्रिकाएं कविता संग्रह पढ़ा| वे मेरे जैसे बहुत सारे विद्यार्थियों को रास्ता दिखाए होंगे|
        गाँव के लोग उन्हें "गंड़ा मास्टर" कहते थे| मैं उनके घर पुस्तक लेने जाता था | कभी कभी पानी मांगकर  पी लेता था| हमारे बड़े गुरुजी की पत्नी मुझे डाँटती थी - केंता रे, तुईं परे गंड़ा मास्टर घरें पानी पीइसू? ने जीबू तार घर के | (क्यों रे, तुम गांड़ा मास्टर के यहां पानी पीते हो मत जाना उसके घर |)
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         अर्थ शास्त्र के अनुसार पारिश्रमिक (वेतन) लेकर अध्यापन करने वाले शिक्षक श्रमिक हैं|
          कुछ शिक्षक अपनी निर्धारित ड्यूटी के अलावा भी अपने विद्यार्थियों के लिए कुछ करते हैं, मार्गदर्शन करते हैं । यह उनकी गुरुता है | वे ही गुरू होते हैं|
ऐसे ही मेरे गुरू श्री सोनसाय चौहान को नमन|
          | हमारे महान गांड़ा मास्टर को नमन|

अंतर्जातीय विवाह

अंतर्जातीय विवाह _
         बहुत तकलीफ होती है जब अंतर्जातीय विवाह करने वालों को और उनके घर वालों को जाति समाज द्वारा बहिष्कार का दंड दिया जाता है । इसी डर से माता पिता अपने पुत्र /पुत्रियों को अंतर्जातीय विवाह के लिए सहमति नहीं देते । फल स्वरूप युवक युवती घर से भाग कर शादी करते हैं या आत्म हत्या कर लेते हैं ।
                  संस्कृति की दुहाई देकर अंतर्जातीय विवाह का विरोध किया जाता है । मेरी जानकारी में कोलता,  अघरिया,. . ,  .  . , ... सभी जाति में मांसाहार शाकाहार दोनो प्रचलित है,  अब  सभी जाति में कुछ लोग मुर्गा,  शराब भी चलाने लगे हैं । पहनावा भी समान है । मातृ भाषा, बोली समान होने से भी उनके संस्कार में बहुत अंतर भी देखा गया है । छत्तीसगढ़ के रायगढ़ रायपुर के ओड़िया भाषी और ओडिशा के झारसुगड़ा सम्बलपुर सुंदरगढ़ के ओड़िया भाषी के संस्कार में अंतर देखा गया है । धमतरी  और रायगढ़ रायपुर वालों के संस्कार में बहुत फ़र्क होता है ।
        OBC और ब्राह्मण मारवाड़ी क्षत्रिय के जीवन यापन के पुश्तैनी धंधे अलग अलग हैं लेकिन अब लोग वह छोड़ कर नौकरी करने लगे हैं । आजकल खानपान में भी परिवर्तन हो रहा है । ब्राह्मण मारवाड़ी भी शराब मांस मछली खाने लगे हैं ।
         रक्त मिश्रण की चिंता जता कर अंतर्जातीय विवाह का विरोध करते  हैं लेकिन किसी की जाति बिना देखे आवश्यकता होने से खून ले लेते हैं अपने शरीर में । रक्त मिश्रण तो हो गया ।
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यह पोस्ट विचार विमर्ष के लिए है । अंतर्जातीय विवाह का समर्थन  करें न करें, उन्हें उनके घर आने से जाति बहिष्कार का दंड नहीं होना चाहिए । इसी डर से परिवार वाले अपने पुत्र / पुत्री को अन्तर्जातीय शादी की सहमति नहीं देते । फल युवक युवती स्वरूप आत्म हत्या कर लेते हैं ।

रविवार, 19 जुलाई 2020

अंतर्जातीय विवाह और सामाजिक बहिष्कार

अंतर्जातीय विवाह करने वालों को जाति समाज द्वारा दिया गया सामाजिक बहिष्कार का कठोर दंड 
देश निकाला, आजीवन कारावास या मृत्यु दंड जैसा होता है । कोई रिश्वत खाए,  सरकारी या संस्था का रूपया खाए, बेइमानी करे,  अपने परिवार या दूसरे का जमीन हड़प ले,....  उन्हें कोई समाज कोई दंड नहीं देता । वैसे संविधान विरुद्ध है यह सामाजिक बहिष्कार ।

शनिवार, 18 जुलाई 2020

यमक अलंकार - दो नशा

यमक अलंकार -
एक नशा से मनुष्य कुछ देर प्रभावित होता है ।मस्तिष्क पर नियंत्रण कम हो जाने से मन उड़ने लगता है,  मन का राजा हो जाता है । हिम्मत आ जाती है, जो चाहे कह सकता है गाली गलौच करने लगता है,  कुछ भी कर सकता है, अपराध कर सकता है। इस नशा को पाने के लिए कुछ दाम चुकाना पड़ता है, अपना और परिवार का आर्थिक नुकसान होता भी है ।
  दूसरे नशा से मनुष्य जीवन भर प्रभावित रहता है । सरल सीधे लोग इस से कोई गलत काम नहीं करते, दयालु , ईमानदार होते हैं । जो खर्च करते हैं उससे अपने परिवार और देश समाज की भलाई होती है । कुटिल चालक लोग इस नशे के प्रभाव से स्वार्थ के लिए खूब अपराध भ्रष्टाचार करते हैं 
, कभी कभी अपने किये पाप विभिन्न तरीके से धो लेते हैं । पाप धोने में जितना खर्च करते हैं उससे लाख लाख गुना अर्जित करते हैं । इनके कर्म से देश समाज का बहुत अहित होता है ।

मंगलवार, 14 जुलाई 2020

भ्रष्टाचार में कमी नहीं हो रही

पता नहीं. 
नमाज, बाइबिल, गीता, रामायण पढ़ने से क्या होगा?  कहानी और उनके कही बात को जान लेंगे बस । लेकिन इससे क्या होगा?  बहुत सारे लोग पढ़ते हैं लेकिन दुनियां में मार काट खून खराबा लड़ाई झगड़े,   भ्रष्टाचार,  कम नहीं हो रहे हैं ।

गुरुवार, 2 जुलाई 2020

संस्थान उपक्रमों के नाम

सोशल मीडिया में चर्चा है कि नेहरू जी के कार्यकाल में जितने संस्थान, उपक्रम  बने सब में  नेहरू जी का नाम जोड़ दिया गया । 
खैर जो हुआ हुआ। 
अब 2014 के बाद सब में  मोदी जी का नाम जोड़ना चाहिए । नये नोट, नये मिसाइल,  सर्जिकल स्ट्राइक,  चीन युद्ध रणनीति , अमेरिका दोस्ती,..... 
भविष्य में भी यह परम्परा जारी रहनी चाहिए ।

बुधवार, 1 जुलाई 2020

आर्य

कहते हैं आर्य कोई जाति नहीं,  गुण  है । आर्य का अर्थ श्रेष्ठ । सवर्ण सवर्ण को आर्य कहकर सम्बोधन करते थे । याने खुद श्रेष्ठ बाकी सब छोटे,  शुद्र,  एकलव्य,  शम्बुक... 

आस्तिक नास्तिक

माना गया है जो वेद को मानता है वह आस्तिक,  जो नहीं मानता वह नास्तिक ।
लेकिन शब्दार्थ अनुसार 
सः (ईश्वर) अस्ति अर्थात ईश्वर है ऐसा मानने वाला आस्तिक ।
सः (ईश्वर) न अस्ति अर्थात वह नहीं है ऐसा मानने वाला नास्ति ।