रविवार, 27 दिसंबर 2020

जंगल में तपस्या

जंगल में तपस्या करने से भगवान के दर्शन और आशीर्वाद मिलता है । मोक्ष ओर स्वर्ग मिलता है ।
स्वर्ग में अप्सराएं सोम रस उपलब्ध होते हैं । वहां कोई काम करना नहीं पड़ता । सुख, आनंद ही आनंद ।
लेकिन आज कल बहुत कम लोग तपस्या करते हैं ।

शुक्रवार, 25 दिसंबर 2020

गांधी जी और वर्ण व्यवस्था

अम्बेडकर भक्त कहते हैं कि गांधी जी मनु के वर्ण व्यवस्था के पक्षधर थे ।
तो क्या हुआ? मुंडे मुंडे मतिर्भिनाः। 
गांधी जी किसी शुद्र दलित को पढ़ने पढ़ाने, शिक्षक मंत्री बनने, वोट देने, से नहीं रोका । अछूतों से अछूत व्यवहार नहीं किया ।

धर्म में सवाल नहीं

सभी धर्म दिमाग आंख सब बंद कर चुपचाप मानने के लिए कहते हैं । कोई तर्क नहीं, सही कोई सवाल नहीं ।

वीर या आधा वीर


सावरकर जी आजादी की लडाई में शामिल हुए.  इसीलिए उन्हें कालापानी की सजा हुई.  बाद में माफ़ीनामा लिख कर सजा से मुक्त हुए.  उनके आजादी की लड़ाई, कालापानी  के कष्ट की सोचें। 
यह भी सोचें हमने देश के लिए क्या किया?  हम होते तो क्या करते? 
सावरकर जी को पूरा वीर भले ही न कहें आधा वीर तो कह सकते हैं ।




गुरुवार, 24 दिसंबर 2020

गांधी जी का हरिजन और मोदी जी का दिब्यांग

गांधी जी ने कथित शुद्र दलित को प्यार से हरिजन कहा था. सम्मान देने की नियत से । (उन्होंने कभी किसी दलित शुद्र का तिरस्कार अपमान नहीं किया। ) जैसे मोदी जी ने विकलांग अपंग को भी दिब्यांग नाम दिया उन्हें सम्मान देने के लिए ।
        कथित दलित शुद्रों को तिरस्कार के भाव से हरिजन कहें या SC उन्हें बुरा तो लगेगा ही । उसी तरह विकलांग अपंग दिब्यांग ।

रविवार, 20 दिसंबर 2020

गांधी ओर हरिजन

गांधी और हरिजन 
यह तर्क है तर्क करने के लिए. 
कथित दलित शुद्र हरिजन हैं तो बाकी राक्षस हैं क्या? 
उन्हें गांधी जी ने हरिजन कहा था उसमें कोई तिरस्कार अपमान का भाव नहीं था । 
ये भीम के भक्त अम्बेडकर को सबसे महान, सबसे बड़ा बनाने के लिए गांधी जी की तुलना कर उनके बारे में झूठ अफवाह फैलाते हैं । वे कहते हैं कि गांधी जी कथित शुद्रों के शुभ चिंतक नहीं थे । उन्हें हरिजन कहकर उनका अपमान किया । वे इसके साथ एक झूठ फैला रहे हैं कि जिसके पिता का पता नहीं होता उन्हें हरिजन कहा जाता है याने वौश्या के संतान को । यह सरासर झूठ है । दरअसल जिनके पिता का पता नहीं होता उन्हें हरिजन नहीं राम जनी कहा जाता है । (इसका मतलब यह भी नहीं कि वे श्री राम जी के संतान हैं । )
यह भी ज्ञातव्य है कि 
गांधी जी अपने जीवन में कथित शुद्र दलितों के साथ कभी अछूत ब्यवहार नहीं किया ।
हमारे संविधान में सब को समान अधिकार दिया गया है, कथित शुद्रों हरिजन दलित को भी , उन्हें भी आरक्षण दिया गया है । यह सब गांधी जी जीवित थे तब हुआ है । यह अधिकार केवल एक अम्बेडकर जी की इच्छा से नहीं, पूरे संविधान सभा की सहमति से हुआ है ।

आरक्षण का लाभ देने के लिए हर वर्ग को एक नाम तो देना ही पड़ा । ओ बी सी OBC,  एस टी ST,  एस सी SC ।
कथित शुद्र एस सी SC कहते हैं. कई लोगों के कहने के लहजे में तिरस्कार का भाव होता है ।
यह गलत है । लेकिन धीरे धीरे शिक्षा प्रसार और सझदारी के कारण उन्हें अपमानित करने का भाव , छुआछूत कम हो रहा है ।

बुधवार, 16 दिसंबर 2020

अम्बेडकर

भीम राव अम्बेडकर जी निश्चित ही बहुत intelligent थे, खूब पढाई किये, बहुत सारे डिग्री हासिल किये लेकिन उन्हें देश दुनियां के लिए नहीं, केवल अपनी अछूत जाति के हित से मतलब था ।
        उन्होने  देश के संविधान सभा के ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष के रूप में सभा द्वारा पारित नियम कानून का  बहुत अच्छा ड्राफ्टिंग किया ।

रविवार, 13 दिसंबर 2020

मेरी आस्था

मैं पहले पूरा आस्तिक था । लेकिन अब मुझे किसी भी भगवान देवी देवता भूत प्रेत के अस्तित्व पर विश्वास नहीं है । 
मैं यह सार्वजनिक कर रहा हूं । अपना विचार व्यक्त करना चाहिये । मुझे सिर्फ़ मानवता पर भरोसा है । क्यों कि मनुष्य ही मनुष्य के काम आता है ।
हमारे घर में उन भगवान देवी देवताओं की मुर्ति फोटो हैं क्यों कि घर में मैं अकेला नहीं रहता ।
     अगर वे दुनियां में कहीं हैं तो सब कुछ देख कर मुक दर्शक क्यों बने रहते हैं? स्पष्ट है वे नहीं हैं, कल्पित हैं । अगर हैं तो अपनी duty नहीं कर रहे । ऐसी स्थिति में उनका अस्तित्व क्यों स्वीकार करूं?

भगवान को जानने, पाने की कोशिश


उस कथित  भगवान को जानने की बहुत कोशिश किया। अब कोशिश बंद है । 
कुछ भी नहीं समझा, कुछ भी नहीं जाना । 
उसे खोजने, जानने,पाने की कोशिश करना निरर्थक लगा । 
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इतनी बड़ी दुनियां 
इतने सारे लोग 
आओ 
सबसे प्यार करें ।




गुरुवार, 10 दिसंबर 2020

आर्य और अनार्य


भारत के मूल निवासी (ST, OBC)  बलिष्ठ, सीधे,सरल, सच्चे,निष्कपट , होते थे । आर्य उनकी अपेक्षा बड़े दिमाग वाले याने intellgent होते थे । मूल निवासी जंगल में रहते थे । जंगल के पेड़ पौधों के फल पत्ते और मांस ही उनका मुख्य भोजन था ।

बाद में कुछ (OBC) मैदानी भाग में रहने लगे जो खेती तथा पशु पालन करने लगे । 

आर्यो का सर्वोच्च वर्ण ब्राह्मण बहुत अधिक intelligent थे । उनकी कल्पना शक्ति अद्भुत होती  श। भगवान देवी देवता को पैदा कर लेते श । ग्रहों की चाल स्थिति बदल देते । याने पूरी दुनियां को नचाते ।
      उनका दूसरा वर्ण क्षत्रिय बलशाली थे । वे बाहु बल से किसी भी भाग के राजा बन जाते ।
         तीसरा वर्ण वैश्य भी बड़े दिमाग वाले  होते थे । वे खेत खेत्र में बिना मेहनत किये बुद्धि के बल पर वस्तुओं का उत्पादन करते याने विनिमय कर मालामाल होते ।
      आर्य अपनी सेवा के लिये जिन्हें नगर गाँव के किनारे जगह देकर बसाते थे उन्हें वे शुद्र कहते थे । वे अछूत होते थे ।
  
      आर्य खुद को देव कहते थे और भारत के मूल निवासियों को अनार्य दानव राक्षस कहते थे ।
आर्य अपने कथा कहानियों में मूल निवासियों के राजाओं को खल नायक बताकर उन्हें बदमाश, कुरूप बताते थे तथा उनका उपहास करते थे ।

आर्य अपने दिमाग का उपयोग कर भारत में प्रभाव जमाने लगे । ब्राह्मण के अलावा क्षत्रिय तथा वैश्य के घर में पूजा पाठ करते थे इससे उनकी पर्याप्त आमदनी नहीं होती थी । इसलिए वे भारत के मूल निवासी ST, OBC के घर में भी पूजा पाठ करने लगे । वे आज भी शुद्र के घर में पूजा पाठ शादी विवाह आदि कोई संस्कार , यज्ञ हवन नहीं करते ।
  
ST, OBC, ब्राह्मण, क्षत्रिय , वैश्य और शुद्रों के त्वचा का रंग, रहन सहन, संस्कार उनके क्रिया कलाप, सब  अलग अलग होते थे । कालांतर में सब मिश्रण होते जा रहा है ।

राम नाम सत्य

🤔🤔
अगर राम नाम सत्य है, तो बाकी के क्या है...? जैसे- ब्रम्हा, विष्णु, महेश, दुर्गा , काली, सरस्वती इत्यादि क्या ये सब नाम झूठ है...?🤔

सोमवार, 7 दिसंबर 2020

महिला शिक्षा

महिलाओं को युग युग से शिक्षा से वंचित रखा गया था । कुछ साल से शिक्षा मिल रही  है । धीरे धीरे  सोच विचार , वैज्ञानिक जागरूकता में वृद्धि होने लगी है।

आस्था

आस्था -
 हमारे हिंदू धर्म के अनुसार जो भी होता है पूर्व निर्धारित होता है| याने भगवान द्वारा तय होता है| बाढ़ भूकम्प, युद्ध, दंगे फसाद, हत्या चोरी डकैती, बलात्कार, भ्रष्टाचार... सब कुछ.. 
 कोई पत्ता हिलता हो तो वह भी उपर वाले की मर्जी से होता है ।
 सब कुछ वही करता है| गजब है यह मान्यता| 
कोई इसे बकवास कहे तो उनकी धार्मिक आस्था को चोट लगेगी| और ऐसी मान्यता के प्रचार प्रसार से हमारी वैज्ञानिक आस्था को चोट लगेगी उसका क्या?

रविवार, 6 दिसंबर 2020

मस्तिष्क का फार्मेट

पाठ्य पुस्तकों के अलावा हर तरह की पुस्तकें (हजार हजार) पढ़ कर बचपन से अपने दिमाग में भरे कचरे की सफाई (मस्तिष्क का फार्मेट) कर सार सार को भरते रहना चाहिए ।

शनिवार, 5 दिसंबर 2020

वेद कुरान में विज्ञान?

जो लोग वेद पुराण कुरआन में ज्ञान विज्ञान की बात करते हैं उनको अपने बच्चों को स्कूल कॉलेजों में भेजने के बजाय धार्मिक स्थलों पर ही भेजना चाहिए। 

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

सम्बोधन

हम भारतीय दूसरे अपरिचितों को बड़े प्यार सम्मान से सम्बोधन करते हैं.. भाई भैया, बहन दीदी, चाचा अंकल, चाची आंटी , ..
इसे हम हमारी महान संस्कृति,संस्कार , हमारी महान सभ्यता मानते हैं । फिर भी हम दूसरों के साथ गाली गलौच, अपमान, ईर्ष्या, नुकसान,  चोरी , मार काट , रिश्वतखोरी , ......करते हैं। याने हम नाटक करने में expert हैं । बातचीत में ब्यवहार में सब बहुत  अच्छे। सब को प्रेम सम्मान देते हैं  लेकिन अंदर नफ़रत, जहर, स्वार्थ, जलन, ....
हम किसी समूह को बहुत आत्मीयता दर्शाते हुए  सम्बोधन करते हैं - भाइयों, बहनों,  मित्रों, सज्जनों ...
इससे तो अच्छा है पश्चिम देशों का सम्बोधन - ladies and gents साफ स्पष्ट यथार्थ , कोई नाटक नहीं।