सावरकर जी आजादी की लडाई में शामिल हुए. इसीलिए उन्हें कालापानी की सजा हुई. बाद में माफ़ीनामा लिख कर सजा से मुक्त हुए. उनके आजादी की लड़ाई, कालापानी के कष्ट की सोचें।
यह भी सोचें हमने देश के लिए क्या किया? हम होते तो क्या करते?
सावरकर जी को पूरा वीर भले ही न कहें आधा वीर तो कह सकते हैं ।
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