गुरुवार, 10 दिसंबर 2020

आर्य और अनार्य


भारत के मूल निवासी (ST, OBC)  बलिष्ठ, सीधे,सरल, सच्चे,निष्कपट , होते थे । आर्य उनकी अपेक्षा बड़े दिमाग वाले याने intellgent होते थे । मूल निवासी जंगल में रहते थे । जंगल के पेड़ पौधों के फल पत्ते और मांस ही उनका मुख्य भोजन था ।

बाद में कुछ (OBC) मैदानी भाग में रहने लगे जो खेती तथा पशु पालन करने लगे । 

आर्यो का सर्वोच्च वर्ण ब्राह्मण बहुत अधिक intelligent थे । उनकी कल्पना शक्ति अद्भुत होती  श। भगवान देवी देवता को पैदा कर लेते श । ग्रहों की चाल स्थिति बदल देते । याने पूरी दुनियां को नचाते ।
      उनका दूसरा वर्ण क्षत्रिय बलशाली थे । वे बाहु बल से किसी भी भाग के राजा बन जाते ।
         तीसरा वर्ण वैश्य भी बड़े दिमाग वाले  होते थे । वे खेत खेत्र में बिना मेहनत किये बुद्धि के बल पर वस्तुओं का उत्पादन करते याने विनिमय कर मालामाल होते ।
      आर्य अपनी सेवा के लिये जिन्हें नगर गाँव के किनारे जगह देकर बसाते थे उन्हें वे शुद्र कहते थे । वे अछूत होते थे ।
  
      आर्य खुद को देव कहते थे और भारत के मूल निवासियों को अनार्य दानव राक्षस कहते थे ।
आर्य अपने कथा कहानियों में मूल निवासियों के राजाओं को खल नायक बताकर उन्हें बदमाश, कुरूप बताते थे तथा उनका उपहास करते थे ।

आर्य अपने दिमाग का उपयोग कर भारत में प्रभाव जमाने लगे । ब्राह्मण के अलावा क्षत्रिय तथा वैश्य के घर में पूजा पाठ करते थे इससे उनकी पर्याप्त आमदनी नहीं होती थी । इसलिए वे भारत के मूल निवासी ST, OBC के घर में भी पूजा पाठ करने लगे । वे आज भी शुद्र के घर में पूजा पाठ शादी विवाह आदि कोई संस्कार , यज्ञ हवन नहीं करते ।
  
ST, OBC, ब्राह्मण, क्षत्रिय , वैश्य और शुद्रों के त्वचा का रंग, रहन सहन, संस्कार उनके क्रिया कलाप, सब  अलग अलग होते थे । कालांतर में सब मिश्रण होते जा रहा है ।

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