यः धारयति सः धर्मः| जो धारण करें वह धर्म है| जो धारण करने योग्य हो वह धर्म है | धर्म = गुण धर्म|
सनय समय पर विचारकों ने धारण करने के लिए नियम सुझाए| सभी ने अलग अलग सुझाया| सबका सुझाव परस्पर विरोधी है| कई धर्म हैं संसार में| (हिंदू, मुस्लिम, इसाई, .... . ) इस परस्पर विरोधी धर्मों को समझकर गौतम बुद्ध ने कहा -"अप्प दीपो भव" अपना दीपक स्वयं बनो| अपना रास्ता स्वयं चुनो|
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एक सर्वमान्य धर्म हो सकता है वह मानवता का धर्म|
इसी धर्म का विम्ब है हमारा संविधान| यही हमारा धर्म होना चाहिए|
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सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
गुरुवार, 26 अप्रैल 2018
धर्म
रविवार, 8 अप्रैल 2018
सकून
सच हो या न हो ..
ईश्वर, आत्मा, पुनर्जन्म की धारणा को मान लेने से मन को शांति मिलती है, एक आशा .. हम फिर जन्म लेंगे| ये मरना और जन्म लेना चलता रहेगा,,,हमारी आत्मा तो कभी मरेगी नहीं|
सारे प्रश्न समाप्त हो जाते हैं|
शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018
प्राण प्रतिष्ठा
मंत्रों से किसी पत्थर की मूर्ति पर प्राण प्रतिष्ठा कर जीवित कर सकते हैं लेकिन किसी मृत प्राणी को जीवित नहीं कर सकते|
वे ठगते हैं| हम ठगाते हैं|
सोमवार, 2 अप्रैल 2018
रविवार, 1 अप्रैल 2018
विद्यार्थियों के लिए
जो लकीर के फकीर नहीं बनना चाहते खास कर
युवा वर्ग के लिए_ ****
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लकीर के फकीर चालाक और स्वार्थी लोग नहीं चाहते कि नई पीढ़ी के दिमाग खुले हों|
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जो बिना सोचे समझे दूसरों की हाँ में हाँ मिलाते हैं, लिखी हुई या सुनी हुई बात को बिना विचारे स्वीकार कर लेते हैं वे अपने दिमाग का उपयोग नहीं करते|
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उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ो| इतिहास विज्ञान खूब पढ़ो| पढ़ कर सुन कर सोच विचार करो|
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हर बात पर प्रश्न करो| क्या? क्यों? कैसे?
सबसे महत्वपूर्ण है क्यों???
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जिनके पास कोई तर्क आधार युक्त जबाब नहीं होता वे गाली देने लगते हैं|
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जो इंटेलिजेंट होते हैं वे लकीर के फकीर नहीं हो सकते| वे विद्रोही होते हैं|
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दिमाग खुली रखो| तर्क करो| आधार सहित जबाब दो| जबाब न हो तो गाली मत दो|
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जो डिबेट पसंद नहीं करते वे सच जानना नहीं चाहते या जान बूझकर सच को उजागर होने देना नहीं चाहते |
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