गुरुवार, 26 अप्रैल 2018

धर्म

यः धारयति सः धर्मः| जो धारण करें वह धर्म है| जो धारण करने योग्य हो वह धर्म है | धर्म = गुण धर्म|
सनय समय पर विचारकों ने धारण करने के लिए नियम सुझाए| सभी ने अलग अलग सुझाया| सबका सुझाव परस्पर विरोधी है| कई धर्म हैं संसार में| (हिंदू, मुस्लिम, इसाई, .... . ) इस परस्पर विरोधी धर्मों को समझकर गौतम बुद्ध ने कहा -"अप्प दीपो भव" अपना दीपक स्वयं बनो| अपना रास्ता स्वयं चुनो|
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  एक सर्वमान्य धर्म हो सकता है वह मानवता का धर्म|
इसी धर्म का विम्ब है हमारा संविधान| यही हमारा धर्म होना चाहिए|
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रविवार, 8 अप्रैल 2018

सकून

सच हो या न हो  ..
ईश्वर, आत्मा, पुनर्जन्म की धारणा को मान लेने से मन को शांति मिलती है, एक आशा ..  हम फिर जन्म लेंगे| ये मरना और जन्म लेना चलता रहेगा,,,हमारी  आत्मा तो कभी मरेगी नहीं|
सारे प्रश्न समाप्त हो जाते हैं|

शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018

प्राण प्रतिष्ठा

मंत्रों से किसी पत्थर की मूर्ति पर प्राण प्रतिष्ठा कर जीवित कर सकते हैं लेकिन किसी  मृत प्राणी को जीवित नहीं कर सकते|
वे ठगते हैं| हम ठगाते हैं|

रविवार, 1 अप्रैल 2018

विद्यार्थियों के लिए

जो लकीर के फकीर नहीं बनना चाहते खास कर
युवा वर्ग के लिए_ ****
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लकीर के फकीर चालाक और स्वार्थी  लोग नहीं चाहते कि नई पीढ़ी के दिमाग खुले हों|
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जो बिना सोचे समझे दूसरों की हाँ में हाँ मिलाते हैं, लिखी हुई या सुनी हुई बात को बिना विचारे स्वीकार कर लेते हैं वे अपने दिमाग का उपयोग नहीं करते|
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उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ो| इतिहास विज्ञान खूब पढ़ो| पढ़ कर सुन कर सोच विचार करो|
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हर बात पर प्रश्न करो| क्या? क्यों? कैसे?
         सबसे महत्वपूर्ण है क्यों???
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जिनके पास कोई तर्क आधार युक्त जबाब नहीं होता वे गाली देने लगते हैं|
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जो इंटेलिजेंट होते हैं वे लकीर के फकीर नहीं हो सकते| वे विद्रोही होते हैं|
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दिमाग खुली रखो| तर्क करो| आधार सहित जबाब दो| जबाब न हो तो गाली मत दो|
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जो डिबेट पसंद नहीं करते वे सच जानना नहीं चाहते या जान बूझकर सच को उजागर होने देना नहीं चाहते |
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