यः धारयति सः धर्मः| जो धारण करें वह धर्म है| जो धारण करने योग्य हो वह धर्म है | धर्म = गुण धर्म|
सनय समय पर विचारकों ने धारण करने के लिए नियम सुझाए| सभी ने अलग अलग सुझाया| सबका सुझाव परस्पर विरोधी है| कई धर्म हैं संसार में| (हिंदू, मुस्लिम, इसाई, .... . ) इस परस्पर विरोधी धर्मों को समझकर गौतम बुद्ध ने कहा -"अप्प दीपो भव" अपना दीपक स्वयं बनो| अपना रास्ता स्वयं चुनो|
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एक सर्वमान्य धर्म हो सकता है वह मानवता का धर्म|
इसी धर्म का विम्ब है हमारा संविधान| यही हमारा धर्म होना चाहिए|
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सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
गुरुवार, 26 अप्रैल 2018
धर्म
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