रविवार, 27 मार्च 2022

नास्तिक

ईश्वर के अस्तित्व पर
कुछ लोग जीवन भर जानने की कोशिश करते हैं नहीं जान पाते| कुछ लोग जानना ही नहीं चाहते कही सुनी लिखी गई बातों को मान लेते हैं| कुछ जानने की कोशिश कर अंततः नास्तिक हो जाते हैं
नास्तिक हुए ---
ऋषि चार्वाक
ऋषि जाबालि
गौतम बुद्ध
वीर भगत सिंह
पेरियार स्वामी
डॉ कोबूर
सरिता के संपादक विश्वनाथ
और भी बहुत....
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दुनियां में बहुत लोग ईश्वर के अस्तित्व पर जानना चाहते हैं| बेहतर है उसके अस्तित्व सिद्ध करने के लिए उचित आधार तर्क की जानकारी सोशल मिडिया में दें| फेसबुक के हजारों पाठकों को लाभ होगा|..

शनिवार, 5 मार्च 2022

मनु रामायण महाभारत काल के बाद के थे

रामायण  महाभारत के बाद मनु स्मृति 
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 मनु स्मृति के अनुसार चार वर्ण ब्राह्मण , क्षत्रीय,  वैश्य, शुद्र का 
काम क्रमशः -
ब्राह्मण - पढ़ना पढ़ाना,  यज्ञ हवन पूजा पाठ करना , दान दक्षिणा लेना। 
क्षत्रीय - अश्त्र शस्त्र धारण कर राज्य के लिये युद्ध करना ।
वैश्य - व्यापार करना। समय और स्थान परिवर्तन से किसी वस्तु, मुद्रा के मूल्य में वृद्धि अर्थात लाभ कमाना।
(वैश्य संस्कृत [संज्ञा पुल्लिंग] 1. हिंदू वर्णव्यवस्था में निरूपित तीसरा वर्ण,  उक्त वर्ण का व्यक्ति 2. व्यापार करने वाला व्यक्ति ; व्यापारी।)
शुद्र - सेवा करना ।
मनु ने चारों वर्ण के लिये अलग अलग उपनाम लिखने का निर्देश दिये  है। उच्च तीन वर्णों को निम्नानुसार अलग अलग जनेऊ धारण करने का निर्देश दिये हैं ।
वर्ण   - उपनाम - जनेऊ 
ब्राह्मण - शर्मा  -  रेशम 
क्षत्रीय  - सिंह  -  कपास 
वैश्य     - गुप्त  - जूट
शुद्र      - दास 
(ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य, ये तीन वर्ण विद्याध्ययन से दूसरा जन्म प्राप्त करते हैं | विद्याध्ययन न कर पाने वाला शूद्र, चौथा वर्ण है | इन चार वर्णों के अतिरिक्त आर्यों में या श्रेष्ट मनुष्यों में पांचवा कोई वर्ण नहीं है।)
 मनु स्मृति को रामायण, महाभारत काल से पहले का माना जाता है किन्तु  यह सत्य प्रतीत नहीं होता । क्योंकि मनु के निर्देशानुसार वर्ण अनुसार  उपनाम लिखने का कोई प्रमाण रामायण, महाभारत,भगवद्गीता  में नहीं मिलता । कहीं नहीं लिखा है.. राजा श्री दशरथ सिंह, श्री राम सिंह, श्री पांडु सिंह, श्री दुर्योधन सिंह, युधिष्ठिर सिंह.......

गुरुवार, 3 मार्च 2022

हिन्दू धर्म नहीं संस्कृति है

वेद, गीता , रामायण, राम चरित मानस.... में हिन्दू धर्म का उल्लेख नहीं  है ।
उच्चतम न्यायालय ने हिन्दू को एक जीवन शैली कहा। यह धर्म नहीं, संस्कृति है ।
भारतीय जीवन शैली ही हिन्दू संस्कृति है । जो गंगा जमना
तहजीब है ।