रामायण महाभारत के बाद मनु स्मृति
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मनु स्मृति के अनुसार चार वर्ण ब्राह्मण , क्षत्रीय, वैश्य, शुद्र का
काम क्रमशः -
ब्राह्मण - पढ़ना पढ़ाना, यज्ञ हवन पूजा पाठ करना , दान दक्षिणा लेना।
क्षत्रीय - अश्त्र शस्त्र धारण कर राज्य के लिये युद्ध करना ।
वैश्य - व्यापार करना। समय और स्थान परिवर्तन से किसी वस्तु, मुद्रा के मूल्य में वृद्धि अर्थात लाभ कमाना।
(वैश्य संस्कृत [संज्ञा पुल्लिंग] 1. हिंदू वर्णव्यवस्था में निरूपित तीसरा वर्ण, उक्त वर्ण का व्यक्ति 2. व्यापार करने वाला व्यक्ति ; व्यापारी।)
शुद्र - सेवा करना ।
मनु ने चारों वर्ण के लिये अलग अलग उपनाम लिखने का निर्देश दिये है। उच्च तीन वर्णों को निम्नानुसार अलग अलग जनेऊ धारण करने का निर्देश दिये हैं ।
वर्ण - उपनाम - जनेऊ
ब्राह्मण - शर्मा - रेशम
क्षत्रीय - सिंह - कपास
वैश्य - गुप्त - जूट
शुद्र - दास
(ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य, ये तीन वर्ण विद्याध्ययन से दूसरा जन्म प्राप्त करते हैं | विद्याध्ययन न कर पाने वाला शूद्र, चौथा वर्ण है | इन चार वर्णों के अतिरिक्त आर्यों में या श्रेष्ट मनुष्यों में पांचवा कोई वर्ण नहीं है।)
मनु स्मृति को रामायण, महाभारत काल से पहले का माना जाता है किन्तु यह सत्य प्रतीत नहीं होता । क्योंकि मनु के निर्देशानुसार वर्ण अनुसार उपनाम लिखने का कोई प्रमाण रामायण, महाभारत,भगवद्गीता में नहीं मिलता । कहीं नहीं लिखा है.. राजा श्री दशरथ सिंह, श्री राम सिंह, श्री पांडु सिंह, श्री दुर्योधन सिंह, युधिष्ठिर सिंह.......
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