शनिवार, 24 अक्टूबर 2020

DNA Test

सभी जाति में रक्त मिश्रण हुआ है। किसी में कम, किसी में ज्यादा । सभी जाति में गोरे काले सांवले हैं । लेकिन अपनी जाति को श्रेष्ठ मानने वाले  इसे स्वीकार नहीं करते । अन्तर्जातीय विवाह को मान्यता नहीं देते। वे अपनी जाति में रक्त मिश्रण नहीं चाहते । ऐसे जातीय  दम्भ वालों को अपनी अपनी जाति के  सब का DNA test करा लेना चाहिए । 
डी एन ए जांच के बाद परिणाम अनुसार हर जाती को दो भाग बना देना चाहिए । एक शुद्ध , दूसरा मिश्रण। Test में शुद्ध रक्त प्रमाणित लोग ही शुद्ध में रहें बाकी मिश्रण में । अन्तर्जातीय विवाह करने वाले मिश्रण जाति में शामिल हों । इच्छानुसार बिना test कराए मिश्रण में रह सकते हैं 
     

जाति की रक्त शुद्धता

सभी जाति में रक्त मिश्रण हुआ है। किसी में कम, किसी में ज्यादा । सभी जाति में गोरे काले सांवले हैं । लेकिन अपनी जाति को श्रेष्ठ मानने वाले  इसे स्वीकार नहीं करते । अन्तर्जातीय विवाह को मान्यता नहीं देते । वे अपनी जाति में रक्त मिश्रण नहीं चाहते । फिर भी कुछ युवा प्रेम सम्बन्ध के कारण  अंतरतीय विवाह कर लेते हैं । इससे जाती समाज में  विवाद, भेद, विभाजन  होते हैं। उस परिवार को जाति समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है । या उनके घर में अन्तर्जातीय विवाह करने वाले  पुत्र / पुत्री  कभी न आएं का शर्त और समाज द्वारा तय  जुर्माना  भरने से बहिष्कार से मुक्त हो सकते हैं ।
इसी जातीय अहम् के कारण कई युवाओं का जीवन कठिन हो जाता है, कई आत्म हत्या कर लेते हैं, हत्या कर देते हैं । 
ऐसे जातीय  दम्भ वालों को अपनी अपनी जाति के  सब का DNA test करा लेना चाहिए । 
डी एन ए जांच के बाद परिणाम अनुसार हर जाती को दो भाग बना देना चाहिए । एक शुद्ध , दूसरा मिश्रण। 

             Test में शुद्ध रक्त प्रमाणित लोग ही शुद्ध में रहें बाकी मिश्रण में । अन्तर्जातीय विवाह करने वाले मिश्रण जाति में शामिल हों । बिना test कराए मिश्रण में रह सकते हैं 
     ऐसा होने से शुद्ध जाति वालों का श्रेष्ठता का अहं सुरक्षित रहेगा।
इस व्यवस्था से समाज में विवाद, बहिष्कार, आत्म  हत्या... नहीं होंगे ।

क्यों???

भारत में सबसे ज्यादा भगवान,सबसे ज्यादा पाठ पूजा,सबसे ज्यादा कर्म कांड फिर भी इतना भ्रस्टाचार,अन्याय,अव्यवस्था, गंदगी क्यो ??

हजारों में से कोई एक

सब की सोच समान नहीं होती ।
कीमती आभूषण हजारों लोग देखते हैं । उनमें से कोई एक का मन लालच करता है ।
उन हजारों लालची में से कोई एक लूटता है ।
उसी तरह जिस्म देख कर भी..... 

सोच और बलात्कार का सम्बन्ध

सच तो यह है कि कपड़े और बलात्कार का कोई सम्बन्ध नहीं है ।सोच और बलात्कार का सम्बन्ध जरूर है ।
अरे! कोई कीमती आभूषण पहना हो तो देख कर लूट लोगे क्या? 

आस्था और तर्क

श्रद्धा आस्था विपरीत होते हैं तर्क विज्ञान से ।
लेकिन हम 
दोनों से चिपके रहना चाहते हैं 

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020

समलैगिंक आकर्षण




  समलैगिंक आकर्षण अधिकतर विवाह के पहले होता है । काम क्षुधा की पूर्ति के लिए विपरित लिंग नहीं मिलने से gay या lesbo sex कर के पूर्ति कर लेते हैं । इसे कोई बीमारी समझना उचित नहीं है । यह किसी भी उम्र में हो सकता  है ।

हर जाति का दो भाग बना देना चाहिए


सभी जाति में रक्त मिश्रण हुआ है। किसी में कम, किसी में ज्यादा । सभी जाति में गोरे काले सांवले हैं । लेकिन 
अपनी जाति को श्रेष्ठ मानने वाले  इसे स्वीकार नहीं करते । अन्तर्जातीय विवाह को मान्यता नहीं देते । वे रक्त मिश्रण होने देना नहीं चाहते । फिर भी कुछ युवा प्रेम सम्बन्ध के कारण  अंतरतीय विवाह कर लेते हैं । इससे जातीय  समाज में  विवाद, भेद, विभाजन  होते हैं। उस परिवार को जाति समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है । या उनके घर में अन्तर्जातीय विवाह करने वाले  पुत्र / पुत्री  कभी नहीं आने के शर्त के साथ  समाज द्वारा तय  जुर्माना  भरने से बहिष्कार से मुक्त हो सकते हैं ।
इसी जातीय अहम् के कारण कई युवाओं का जीवन कठिन हो जाता है, कई आत्म हत्या कर लेते हैं, हत्या कर देते हैं । 
ऐसे जातीय  दम्भ वालों को अपनी अपनी जाति के  सब का DNA test करा लेना चाहिए । 
डी एन ए जांच के बाद परिणाम अनुसार हर जाती को दो भाग बना देना चाहिए । एक शुद्ध , दूसरा मिश्रण। 
भविष्य में अन्तर्जातीय विवाह करने वाले मिश्रण जाति में शामिल हों ।
     ऐसा होने से शुद्ध जाति वालों का श्रेष्ठता का अहं सुरक्षित रहेगा।
इस व्यवस्था से समाज में विवाद, बहिष्कार, आत्म  हत्या... नहीं होंगे ।

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020

प्रदर्शन और लालच

 घर के बाहर अपने जिस्म का प्रदर्शन  उचित नहीं है । अच्छे से शरीर को ढक कर बाहर निकलना चाहिये । देख कर कुछ लोगों को लालच आ जाता है ।

उसी तरह 

अपने  धन के प्रदर्शन के लिए कीमती आभूषण  पहन कर घर से बाहर घूमना भी उचित नहीं है। कुछ लोगों का मन बिगड़ जाता है ।

दोनों ही परिस्थितियों  देश समाज की शांति व्यवस्था खराब होती है । पोलिस, अदालत सब परेशान होते हैं ।

बुधवार, 21 अक्टूबर 2020

अंध भक्ति से हानि

उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ना सुनना चाहिए ।
एक ही तरह की बात सुनने पढ़ने से अंध भक्ति होती है । यह भक्ति देश समाज संसार के लिए बहुत हानिप्रद होती है ।
इसी से आतंकवाद, नक्सलवाद, तानाशाही फलता फूलता है ।

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2020

बच्चे के खाली दिमाग में धर्म आस्था भर दी जाती है

बच्चा जन्म लेता है तब उसके दिमाग में कोई आस्था धर्म भगवान अल्लाह god... कुछ नहीं होता । उसके माता पिता, परिवार के लोग उसके दिमाग में यह सब भरते हैं जिसे वह मान लेता है ।
   कालांतर में कोई कोई सोच विचार कर अपने दिमाग में भरे हुए आस्था विश्वास आस्तिकता को हटाकर विज्ञान को भरते जाते हैं । ॠषि चार्वाक, ऋषि जाबालि, गौतम बुद्ध, भगत सिंह, डाक्टर कोबूर, पेरियार स्वामी, विश्वनाथ (सरिता के सम्पादक) .....
हमारे छत्तीसगढ़ रायगढ़  जिला  के - 
ग्राम लोइंग के स्व श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता (मेरे मित्र, चाचा) पूर्व प्रधान पाठक शास उच्चतर माध्यमिक शाला महापल्ली, 
श्री पद्ममुख पंडा सेवा निवृत्त बैंक मेनेजर निवासी महापल्ली.
पंडरीपानी पूर्व के श्री जगदीश गुप्ता 
रायगढ़ के मुमताज भारती, जयप्रकाश मानस रथ

सोमवार, 19 अक्टूबर 2020

असामान्य लोगों को राजनीति से दूर करना चाहिए

ये बाबा साधु सन्यासी के  विचार, रहन सहन, उपदेश.. आम आदमी से हट कर होता है ।
            असामान्य लोगों को देश की राजनीति में भागीदारी से वंचित करना चाहिए। उनके लिए किसी राजनौतिक मुद्दे पर बात करना , वोट देना प्रतिबंधित होना चाहिए ।

शनिवार, 17 अक्टूबर 2020

कर्म फल और भाग्यफल

कर्म फल वैज्ञानिक सिद्धांत है ।
कर्म का उचित फल मिलता है ।
कारण और परिणाम का सम्बंध वैज्ञानिक है ।
भाग्य फल सिद्धांत कल्पित है झूठ है । इस का प्रचार प्रसार शोषक वर्ग के हित में किया गया ताकि शोषित का शोषण अबाध होता रहे ।

शोषण

जो भी होता है उपर वाले की मर्जी से होता है ।
उसकी इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता 
जो होता है सब भाग्य फल होता है। जैसा किस्मत में लिखा होगा वैसा ही होगा ।

इन धार्मिक भावना से शोषित का शोषण करने में शोषको को सुविधा होती है ।
क्यों कि शोषित संतुष्ट रहता है ।

मन की शांति

जो होता है वही करता है.. 
मान लेने से दिमाग के सारे प्रश्न समाप्त हो जाते हैं । मन शांत हो जाता है । कुछ सोच विचार करने की जरूरत नहीं रह जाती ।
जो भी घटना दुर्घटना हो उसके कारण, निवारण के उपाय जानने करने की जरूरत नहीं । क्यों कि जो हो रहा है सब उसकी इच्छा से हो रहा है ।

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2020

आशीर्वाद

#  "कैसे हो? "
#  "सब आपके आशीर्वाद से अच्छा हूं गुरू जी "
#  बहुत अच्छा लेकिन मेरे आशीर्वाद से नहीं, तुम्हारी अपनी कोशिश से "
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शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2020

परम्परा

पुरानी परम्पराओं के औचित्य पर सोच विचार कर उसका त्याग या पालन करना चाहिए ।
परम्परा -
परम्परा हमारे व्यवहार के तरीकों की द्योतक है।
 परम्परा का अर्थ उन सभी विचारों आदतों और प्रथाओं का योग है, जो व्यक्तियों के एक समुदाय का होता है, और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तान्तरित होता ।

रविवार, 4 अक्टूबर 2020

अम्बेडकर का संविधान या हमारा संविधान

प्रेमचंद का गोदान, तुलसी का राम चरित मानस, धर्मवीर भारती का गुनाहों का देवता..... 
ये सब तो ठीक है. 
लेकिन कुछ लोग बार बार अलापते रहते हैं 
बाबा का संविधान ,
अम्बेडकर का संविधान ..
ये क्या कहना चाहते हैं ।
अम्बेडकर का संविधान होने से तो सर्वाधिकार उनके परिवार का होता, पुस्तक विक्री की रायल्टी भी उन्हें मिलती । उनकी अनुमति के बिना उसमें कोई संशोधन सम्भव नहीं होता ।