सभी जाति में रक्त मिश्रण हुआ है। किसी में कम, किसी में ज्यादा । सभी जाति में गोरे काले सांवले हैं । लेकिन
अपनी जाति को श्रेष्ठ मानने वाले इसे स्वीकार नहीं करते । अन्तर्जातीय विवाह को मान्यता नहीं देते । वे रक्त मिश्रण होने देना नहीं चाहते । फिर भी कुछ युवा प्रेम सम्बन्ध के कारण अंतरतीय विवाह कर लेते हैं । इससे जातीय समाज में विवाद, भेद, विभाजन होते हैं। उस परिवार को जाति समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है । या उनके घर में अन्तर्जातीय विवाह करने वाले पुत्र / पुत्री कभी नहीं आने के शर्त के साथ समाज द्वारा तय जुर्माना भरने से बहिष्कार से मुक्त हो सकते हैं ।
इसी जातीय अहम् के कारण कई युवाओं का जीवन कठिन हो जाता है, कई आत्म हत्या कर लेते हैं, हत्या कर देते हैं ।
ऐसे जातीय दम्भ वालों को अपनी अपनी जाति के सब का DNA test करा लेना चाहिए ।
डी एन ए जांच के बाद परिणाम अनुसार हर जाती को दो भाग बना देना चाहिए । एक शुद्ध , दूसरा मिश्रण।
भविष्य में अन्तर्जातीय विवाह करने वाले मिश्रण जाति में शामिल हों ।
ऐसा होने से शुद्ध जाति वालों का श्रेष्ठता का अहं सुरक्षित रहेगा।
इस व्यवस्था से समाज में विवाद, बहिष्कार, आत्म हत्या... नहीं होंगे ।
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