प्रेमचंद का गोदान, तुलसी का राम चरित मानस, धर्मवीर भारती का गुनाहों का देवता.....
ये सब तो ठीक है.
लेकिन कुछ लोग बार बार अलापते रहते हैं
बाबा का संविधान ,
अम्बेडकर का संविधान ..
ये क्या कहना चाहते हैं ।
अम्बेडकर का संविधान होने से तो सर्वाधिकार उनके परिवार का होता, पुस्तक विक्री की रायल्टी भी उन्हें मिलती । उनकी अनुमति के बिना उसमें कोई संशोधन सम्भव नहीं होता ।
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