परिवारवाद -
पहले
चार वर्ण होते थे। तब परिवारवाद ही चलता था ।
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र ।
तब पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही तरह का पुश्तैनी काम करते थे । नई पीढ़ी बचपनसे ही अपने परिवार के बड़ों से काम सीखता और उसमें पारंगत हो जाता था ।
अब भी
परिवारवाद चल रहा है लेकिन पहले से कम ।
किसान का बेटा किसान, शिक्षक का पुत्र पुत्री शिक्षक , व्यापारी का बेटा ब्यापारी...... किसी को कोई आपत्ति नहीं ।
लेकिन
राजनीति में परिवारवाद से हमें जलन होती है ।