शनिवार, 27 जून 2020

इम्युनिटी बूस्टर को दवा नहीं कहते ।

इम्युनिटी बढ़ाने वाले,  रोग प्रतिरोध क्षमता में वृद्धि करने वाले किसी विटामिन, खनिज युक्त टैबलेट,  सीरप,  अवलेह , पावडर, काढ़ा, चूर्ण दवा के अन्तर्गत नहीं आते । 
       कहा जाता है वृद्ध च्यवन ऋषि ने एक इम्युनिटी बूस्टर बनाए थे ।  उसका सेवन कर वे जवान हो गये । उसे उन महान आयुर्वेद के जानकार ऋषि च्यवन के नाम से च्यवन प्राश कहा जाता है ।

आयुर्वेद बनाम एलोपैथी

कहते हैं अंग्रेजों ने , कांग्रेस  ने एलोपैथी थोप दी ?
 कांग्रेस काल में बहुत आयुर्वेद अस्पताल खोले ।  सब आयुर्वेद इलाज कराएं।  किसने मना किया? 
अंग्रेजों ने विज्ञान थोप दिया तो मत पढ़ाएं अपने बच्चों को उन्हें वेद पुराण कुरान गीता रामायण पढ़ाएं।  भजन कीर्तन नमाज करते रहें । बिना वैज्ञानिक उपकरणों के जीएं।

राहुल गांधी की जाति से लोगों को तकलीफ हो रही

लगता है राहुल गांधी के जनेऊ धारण, ब्राह्म्ण कहलाने पर ब्राह्मणों को आपत्ति हो रही होगी । उन्हें चाहिए राहुल गांधी परिवार का जाति बहिष्कार कर दें। यह तो वही कर सकते हैं  । यह देश का  कानून तो करेगा नहीं ।

वैदिक विज्ञान

कहते हैं हमारे वेदों में सारा विज्ञान है । ऐसा है तो स्कूल कालेजों में विज्ञान के दो ग्रुप हों । वर्तमान विज्ञान और वैदिक विज्ञान। दोनों में से कोई एक लें विद्यार्थी । वर्तमान सरकार तो यह कर सकती है चाहे तो ।

शनिवार, 20 जून 2020

सहसंबंध

आमतौर से 
मनुष्य की उम्र और सरलता में ऋणात्मक, उम्र और  चालाकी में धनात्मक सहसम्बन्ध होता है ।

सारे प्रश्न समाप्त

मन में बहुत सारे प्रश्न आते हैं जिनका तर्क सम्मत आधार युक्त जबाब नहीं मिलता, मन अशांत हो जाता है । मान लें ईश्वर ही सब कुछ करता है तो  सारे प्रश्न समाप्त हो जाते हैं , मन शांत हो जाता है । 
     प्रश्नों से मुक्ति मिल जाती है ईश्वर की सत्ता को मान लेने से । यह कल्पना करने वालों की चालाकी है । ताकि लोगों की आदत बन जाय मान लेने की,  श्रद्धा विश्वास करने की , तर्क प्रश्न समाप्त हो जाए। इससे उन्हें लाभ होता है ।

मंगलवार, 16 जून 2020

आलोचना

जिस के बारे में जानते हैं उसी के बारे में चर्चा होती है. 
अपनी जाति समाज , अपने धर्म,  अपने देश के संविधान पर चर्चा होती है, आलोचना भी करते है ताकि कमी, बुराई को समझ कर उसे दूर कर सकें, परिवर्तन, संशोधन हो ।आज कल हमारे देश के लोग आरक्षण कानून पर बहुत चर्चा कर रहे हैं । विदेशों के कानून पर नहीं  । अपनी जाति समाज, अपने धर्म, संविधान पर चर्चा करनी चाहिए, आलोचना करनी चाहिए, दूसरे जाति समाज,  धर्म , संविधान की नहीं ।

सोमवार, 15 जून 2020

करेण्येव अधिकारस्ते

उपदेशक, शिक्षक ज्ञानी जन कहते हैं_
भगवद् गीता के अनुसार कर्म करना चाहिए किंतु फल की आशा नहीं करनी चाहिए| 
गीता में ऐसा नहीं कहा है|
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गीता के "कर्मेण्येव अधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन" में  परिणाम की आशा नहीं करने के लिए नहीं कहा गया है| कर्म में हमारा अधिकार है चाहे हम करें न करें जैसा करें| कर्म करने के बाद हमारे कर्म के परिणाम में हमारा कोई अधिकार नहीं होता| हर विद्यार्थी परीक्षा में सफलता के लिए मेहनत करता है किंतु उसके परिणाम में उसका अधिकार नहीं होता| किसान फसल लगाता है.... व्यापार, खेल, युद्ध, ...
   वांछित परिणाम की आशा से ही कर्म करते हैं|फल की आशा करें किंतु फल के प्रति आसक्त न हों| आसक्ति होने से इच्छानुसार परिणाम प्राप्त करने के लिए गलत तरीके अनुचित साधनों का प्रयोग करते हैं  | परिणाम के प्रति आसक्ति न हो तो इच्छानुसार परिणाम नहीं मिलने से कर्ता दुःखी नहीं होता हताश नहीं होता, कोई गलत कदम नहीं उठाता आत्म हत्या नहीं करता| पुनः पुनः श्रम करता है |

गुरुवार, 11 जून 2020

गांधी उपनाम

फ़िरोज गांधी इंदिरा गांधी से उनके परिवार में गांधी लिखना चल रहा है । इसमें मजाक उड़ाने की क्या बात है ? जवाहर लाल नेहरू और उनके पूर्वज नेहरू लिखते थे । 
      जिन्हें उनके गांधी लिखने से आपत्ति है उन्हे कोर्ट जाना चाहिए । वैसे चाहें तो वे या कोई भी अपना उपनाम गांधी लिख सकता है । मर्जी अपनी अपनी ।

यमक अलंकार

यमक  अलंकार - एक ही शब्द का अलग अलग अर्थ ।

1- तीन बेर खाती थी वह तीन बेर खाती है। 
2- मनु जी का social distance युगों से और मोदी जी का social distance दो महिना से चल रहा है ।
3- पहले हमारे भारत के ऋषि मुनि तपस्या के बल पर दिब्यांग होते थे । अब  हमारे देश में दिब्यांगों को विभिन्न सरकारी  सहायता मिलती है,  आरक्षण का लाभ मिलता है ।

बुधवार, 10 जून 2020

शब्द जाल

कथा उपदेश सुनाने वाले, टीका करने वाले शब्द जाल का निर्माण करते हैं।  बेचारा श्रोता उस जाल में उलझ जाता है । आखिरी सांस तक कुछ ठीक ठीक समझ नहीं पाता ।

सोमवार, 8 जून 2020

गंगा जल

यादें -
धार्मिक पत्रिकाओं में पढ़ा   -
गंगा जल से हर तरह के कीटाणु जीवाणु मर जाते हैं ।
गंगा जल बोतल में रखें तो कभी खराब  नहीं होता ।
गंगा जल का एक बूंद कुंआ तालाब नदी के पानी में मिला दें तो उसका अपवर्तनांक बहुत बढ़ जाता है ।
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           मैं 1982 में संगम से गंगा जल लाया । एक बोतल में गंगा जल,  दूसरे में कुंए का पानी रखा । एक साल बाद,  दो साल बाद देखा । कोई जल खराब नहीं हुआ था । जस के तस ।
           स्कूल के प्रयोगशाला में गंगा जल का अपवर्तनांक निकाला,  कुएं के पानी के बराबर ही था ।कई बार प्रयोग किया । परिणाम वही ।

शनिवार, 6 जून 2020

सवाल

जो पढ़ कर, देख कर सोच विचार करते हैं वे ही सवाल करते हैं । वे ही intelligent होते हैं। 
बाकी लोग बिना सवाल किये अपने अणु मस्तिष्क में भरते जाते हैं ।