जो भी होता है उपर वाले की मर्जी से होता है ।
उसकी इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता
जो होता है सब भाग्य फल होता है। जैसा किस्मत में लिखा होगा वैसा ही होगा ।
इन धार्मिक भावना से शोषित का शोषण करने में शोषको को सुविधा होती है ।
क्यों कि शोषित संतुष्ट रहता है ।
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