गांधी और हरिजन
यह तर्क है तर्क करने के लिए.
कथित दलित शुद्र हरिजन हैं तो बाकी राक्षस हैं क्या?
उन्हें गांधी जी ने हरिजन कहा था उसमें कोई तिरस्कार अपमान का भाव नहीं था ।
ये भीम के भक्त अम्बेडकर को सबसे महान, सबसे बड़ा बनाने के लिए गांधी जी की तुलना कर उनके बारे में झूठ अफवाह फैलाते हैं । वे कहते हैं कि गांधी जी कथित शुद्रों के शुभ चिंतक नहीं थे । उन्हें हरिजन कहकर उनका अपमान किया । वे इसके साथ एक झूठ फैला रहे हैं कि जिसके पिता का पता नहीं होता उन्हें हरिजन कहा जाता है याने वौश्या के संतान को । यह सरासर झूठ है । दरअसल जिनके पिता का पता नहीं होता उन्हें हरिजन नहीं राम जनी कहा जाता है । (इसका मतलब यह भी नहीं कि वे श्री राम जी के संतान हैं । )
यह भी ज्ञातव्य है कि
गांधी जी अपने जीवन में कथित शुद्र दलितों के साथ कभी अछूत ब्यवहार नहीं किया ।
हमारे संविधान में सब को समान अधिकार दिया गया है, कथित शुद्रों हरिजन दलित को भी , उन्हें भी आरक्षण दिया गया है । यह सब गांधी जी जीवित थे तब हुआ है । यह अधिकार केवल एक अम्बेडकर जी की इच्छा से नहीं, पूरे संविधान सभा की सहमति से हुआ है ।
आरक्षण का लाभ देने के लिए हर वर्ग को एक नाम तो देना ही पड़ा । ओ बी सी OBC, एस टी ST, एस सी SC ।
कथित शुद्र एस सी SC कहते हैं. कई लोगों के कहने के लहजे में तिरस्कार का भाव होता है ।
यह गलत है । लेकिन धीरे धीरे शिक्षा प्रसार और सझदारी के कारण उन्हें अपमानित करने का भाव , छुआछूत कम हो रहा है ।
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