रविवार, 26 जुलाई 2020

अंतर्जातीय विवाह

अंतर्जातीय विवाह _
         बहुत तकलीफ होती है जब अंतर्जातीय विवाह करने वालों को और उनके घर वालों को जाति समाज द्वारा बहिष्कार का दंड दिया जाता है । इसी डर से माता पिता अपने पुत्र /पुत्रियों को अंतर्जातीय विवाह के लिए सहमति नहीं देते । फल स्वरूप युवक युवती घर से भाग कर शादी करते हैं या आत्म हत्या कर लेते हैं ।
                  संस्कृति की दुहाई देकर अंतर्जातीय विवाह का विरोध किया जाता है । मेरी जानकारी में कोलता,  अघरिया,. . ,  .  . , ... सभी जाति में मांसाहार शाकाहार दोनो प्रचलित है,  अब  सभी जाति में कुछ लोग मुर्गा,  शराब भी चलाने लगे हैं । पहनावा भी समान है । मातृ भाषा, बोली समान होने से भी उनके संस्कार में बहुत अंतर भी देखा गया है । छत्तीसगढ़ के रायगढ़ रायपुर के ओड़िया भाषी और ओडिशा के झारसुगड़ा सम्बलपुर सुंदरगढ़ के ओड़िया भाषी के संस्कार में अंतर देखा गया है । धमतरी  और रायगढ़ रायपुर वालों के संस्कार में बहुत फ़र्क होता है ।
        OBC और ब्राह्मण मारवाड़ी क्षत्रिय के जीवन यापन के पुश्तैनी धंधे अलग अलग हैं लेकिन अब लोग वह छोड़ कर नौकरी करने लगे हैं । आजकल खानपान में भी परिवर्तन हो रहा है । ब्राह्मण मारवाड़ी भी शराब मांस मछली खाने लगे हैं ।
         रक्त मिश्रण की चिंता जता कर अंतर्जातीय विवाह का विरोध करते  हैं लेकिन किसी की जाति बिना देखे आवश्यकता होने से खून ले लेते हैं अपने शरीर में । रक्त मिश्रण तो हो गया ।
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यह पोस्ट विचार विमर्ष के लिए है । अंतर्जातीय विवाह का समर्थन  करें न करें, उन्हें उनके घर आने से जाति बहिष्कार का दंड नहीं होना चाहिए । इसी डर से परिवार वाले अपने पुत्र / पुत्री को अन्तर्जातीय शादी की सहमति नहीं देते । फल युवक युवती स्वरूप आत्म हत्या कर लेते हैं ।

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