मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

सम्पूर्ण विश्व के लिए एक धर्म एक संविधान

यः धारयति सः धर्मः| जो धारण करने योग्य हो या धारण करते हैं वह धर्म है|
कुरान, मनु स्मृति, गीता रामायण में बताई गई हर बात/ नियम को क्या पालन करना/मानना संभव है? क्या आप ऐसा करते हैं?
    (मैं केवल नमाज अदा करना, पूजा पाठ भक्ति की बात नहीं कर रहा)
धर्मों में बताई/ कही गई बातों के विपरीत भी हैं हमारे संविधान के नियम कानून|
विशिष्ट वर्ग द्वारा समाज के लिए बनाए गए विभिन्न धर्मों के नियमों को आज का शिक्षित वर्ग समाज के हित में मानने को तैयार नहीं है| इसी लिए लोकतंत्र द्वारा राष्ट्र के हित में सम्पूर्ण समाज के लिए नए नियम कानून बनाए गए जो संविधान कहलाता है|
आज का संविधान राष्ट्र के सम्पूर्ण समाज के हित में सभी धर्मों का संशोधित परिवर्तित रूप है|
लेकिन कई लोग वर्तमान संविधान के साथ साथ धर्मों के पुराने नियमों को भी पालन करना चाहते हैं | जबकि पूरा पूरा पालन करना संभव नहीं है|
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कुछ लकीर के फकीर धर्म में कोई परिवर्तन संशोधन पसंद नहीं करते| धार्मिक नियमों के विपरीत कोई नियम कानून संविधान में भी बनता है तो उसका विरोध करते हैं| उनका वश चले तो धार्मिक नियमों परंपराओं को यथावत संविधान में रख लें|
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बेहत्तर है सभी धर्मों का विसर्जन कर अपने अपने संविधान का पालन करें|
उम्मीद करें भविष्य में सम्पूर्ण विश्व के लिए एक संविधान हो|
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जय जगत|
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