सोमवार, 17 अप्रैल 2017

धर्म का संशोधित रूप संविधान

जिसका धारण करना अर्थात पालन करना अनिवार्य होता था उसे धर्म कहते थे|| लेकिन देश काल परिस्थिति अनुसार परिवर्तन संशोधन होना चाहिए| अब हमारा धर्म हमारा संविधान होना चाहिए|

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