सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए.
सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
मंगलवार, 27 दिसंबर 2016
दिब्येन्द्रीय
कहते हैं पहले के ऋषि मुनी साधु संतों के कर्मेन्द्रीय ज्ञानेन्द्रीय सभी अंग दिब्य होते थे, अलौकिक अद्भुत क्षमतावान होते थे| क्या आज कोई दिब्येन्द्रीय/दिब्यांग हैं?
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