धोखा- -
किसी ने मेरे एक मित्र डॉ एस एस गुप्ता जी को एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कहा| बताया " कार्यक्रम शिक्षा से संबंधित है| शिक्षा में रुचि रखने वाले आप लोगों को अवश्य जाना चाहिए|
मित्र के कहने से मैं निर्धारित तिथि को रायगढ़ के रेड क्वीन में समय पर उपस्थित हो गया| कई युवक युनिफार्म में आगंतुकों का स्वागत कर रहे थे|मेरे मित्र को मेसेज किया कि मैं पहुँच गया हूँ| हाल के अंदर मुझे बैठाया गया|
कुछ देर बाद घोषणा हुई - हमारी कंपनी आपके फायदे के लिए आपके शहर में काम शुरू करने जा रही है| आप सब को कंपनी के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए पधार रहे हैं मिस्टर अबस | आप लोग उनके स्वागत में खड़े हो जाएं, जोरदार तालियां बजाइए| सब खड़े होकर ताली बजाने लगे|
मुझे अजीब लग रहा था| मैं क्यों खड़ा होता| क्यों स्वागत करता| मैं खड़ा नहीं हुआ, चुपचाप बैठा रहा|
खैर वे मंचासीन हुए| उन्हें तालियों की गड़गड़ाहट के बीच बड़ा सा फूल माला पहनाया गया|
माइक लेकर मिस्टर अबस ने कहा-
आप सबका मैं अभिनंदन करता हूँ| मैं जानता हूँ आपका शहर उर्जावान है| रायगढ़ के युवा बहुत उर्जावान हैं|
पीछे से तालियों की गड़गड़ाहट|
है कि नहीं?
पीछे से आवाज - हाँ हम उर्जावान है्ं|
वे दोनो हाथ उपर नीचे 180, 90, 45 अंश में घुमा रहे थे| मुझे हमारे देश के एक बड़े नेता के भाषण देने की स्टाइल याद आ रही थी|
पीछे से तालियों की गड़गड़ाहट|
है कि नहीं! बोलिये|
पीछे से आवाज- हां हैं|
मैं यह भी जानता हूं कि आप सब कुछ करना चाहते हैं| बड़ा आदमी बनना चाहते हैं| है कि नहीं?
पीछे से आवाज - हाँ हम बड़ा बनना चाहते हैं|
तो हम आपको बहुत धनी बनाना चाहते हैं| बोलिए बनना चाहते हैं?
पीछे से आवाज- हां हम धनी बनना चाहते हैं|
मैं परेशान हो रहा था| कहां फँस गया| मुड़कर देखा पूरा हाल भरा था| पीछे कुछ लोग युनिफार्म में खड़े थे जो बीच बीच में में ताली बजा रहे थे | उत्साहित करने के लिए समवेत स्वर में जी हां जी हां बोल रहे थे|
अब मैं झेल नहीं सका| हेलमेट उठाया, बाहर चला आया| पीछे बैठे थे मेरेे मित्र | वे भी मेरे पीछे पीछे बाहर आ गए|
किसी कहने से पहली बार मेरा समय बरबाद हुआ| बहुत अखर रहा था|
हमारे गाँव लोइंग के रविवारीय स्वाध्याय केंद्र का समय हो रहा था जहां हम सेवा निवृत शिक्षक कर्मचारी निःशुल्क ट्यूशन पढ़ाते हैं प्राथमिक माध्यमिक विद्यार्थियों को| हम दोनो मित्र बिना चाय नास्ता किए सीधे लोइंग पहुँचे स्वाध्याय केंद्र में|
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016
धोखा
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