गांधी जी को महात्मा, राष्ट्र पिता; नेहरू को चाचा, सरोजनी नायडू को भारत कोकिला, सुभाष चंद्र बोस को नेता जी.. ... ये सब नामकरण सरकार द्वारा नहीं किया गया है| लोग अपनी मर्जी से इस तरह का उपनाम जोड़ देते हैं| अगर किसी को इन नामों से आपत्ति जलन हो तो वे उपयोग न करें| साहित्यकार अपना उप नाम वेद से पूछकर नहीं स्वयं अपनी मर्जी से रखते हैं|
किसी का नामकरण वेद से पूछकर नहीं होता| हमारे देश का नामकरण भी नहीं| कौन कौन सा काम वेद अनुसार हो रहा है? देश की आजादी की लड़ाई वेद के अनुसार नहीं होने के कारण वेद के जानकारों ने उस लड़ाई में भाग नहीं लिए क्या? यह लोकतंत्र, चुनाव, शुद्रों के लिए स्कूल, ब्राह्मणों का नौकरी करना, छूआ छूत न मानना, .... यह सब वेद अनुसार हो रहा है क्या?
वेद को जो देखे भी नहीं वे गांधी को राष्ट्र पिता कहने से वेद का हवाला देकर आपत्ति कर रहे हैं|
बौद्ध, जैनी, आर्य समाजी, पं श्री राम शर्मा गायत्री शक्ति पीठ के अवुयायी.... क्या वेद को मानते हैं?
हम वेद को माने या नहीं यह हमारी मर्जी है| वेद को मानने के लिए हमारे संविधान में कोई कानून नियम नहीं बनाया गया है| हम हमारे संविधान को मानेंगे|
हमारा संविधान ही हमारा धर्म है|
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
रविवार, 22 जनवरी 2017
वेद और नामकरण
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