पद्ममुख पंडा_
बहुत से धर्माचार्य ईश्वर को अपना रक्षा कवच मानते हैं जिस दिन सिद्ध हो गया कि ईश्वर नहीं है उस दिन इनके आजीविका का माध्यम भी समाप्त हो जाएगा
कहते हैं कि ईश्वर अनुभव में होता है उसे देखने के लिए दिव्य दृष्टि चाहिए क्या ईश्वर नहीं चाहता कि संपूर्ण संसार उसे दिव्य दृष्टि से देखे पूरा विश्व खुशियों से भरा हो?
भ्रांतिपूर्ण स्थिति से उबरने के लिए बुद्धि व तर्क ही एकमात्र उपाय है इसी में जगत का कल्याण निहित है|
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
मंगलवार, 16 अक्टूबर 2018
जगत का कल्याण
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