मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

समाज सेवा

एक जातीय सामाजिक संगठन के बड़े नेता ने मुझसे कहा -  "आप सेवा निवृत्ति के बाद समाज सेवा करते हैं?"
मैंने कहा - "हाँ| अपने तरीके से  मुझसे जो बनता है करता हूँ|
उन्होंने कहा - " नहीं, वो नहीं| मैं अपनी जाति समाज की बात कर रहा हूँ|"
मैंने कहा - "मैं ऐसा कुछ तो नहीं करता|"
         ******************
मैं अपने गाँव के  सैकड़ों विद्यार्थियों को घर में सुबह शाम कई साल निःशुल्क पढ़ाया| अपने गाँव में गरीब विद्यार्थियों के सहयोग के लिए विद्यार्थियों के सहयोग से गाँधी निधि का संचालन किया| गाँव में एक पुस्तकालय की स्थापना कर सैकड़ों पुस्तकें देने के अलावा कई पत्रिकाएँ नियमित मंगाता था| अपने गाँव में हर साल होने वाले साँस्कृतिक कार्यक्रम में कई साल तक विद्यार्थियों के उत्साह वर्धनार्थ  पुरष्कार का व्यय वहन किया|
अपने स्कूल के कई जरूरतमंद विद्यार्थियों को परीक्षा फीस, पाठ्य पुस्तक दिया हूँ| सेवा निवृत्ति के बाद बटमूल आश्रम महाविद्यालय महापल्ली जिला रायगढ़ के पुस्तकालय को जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए हर साल एक सेट विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित पुस्तकें देता हूँ| छ: पत्रिकाएँ (हंस, समर लोक, लोकाक्षर, अभियान, तर्कशील, आरोग्य) डाक से सीधे महाविद्यालय को भेजने के लिए आजीवन सदस्यता शुल्क पटाया हूँ| पत्रिकाएँ नियमित पहुँच रही हैं| इसके अलावा उस विद्या मंदिर में एक बार दान भी दिया| क्योंकि वह एक ऐसा मंदिर है जहाँ साक्षात देवी देवता देवों के देव महादेव श्री शशिधर पंडा जी के मार्गदर्शन में बहुत कम वेतन लेकर विद्या दान करते हैं|
     कभी कभी मेरे मित्र आनंद प्रधान के साथ हमारे क्षेत्र के स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं| इंटेलिजेंट बनने के गुर बताते हैं| सामान्य ज्ञान, स्वास्थ्य की बातें बताते हैं|
      हमारे गाँव लोइंग के सेवा निवृत शिक्षक  रविवारीय स्वाध्याय केंद्र में पढ़ाते हैं|
       मैं इतने में ही खुश हूँ| इससे ज्यादा नहीं कर सकता|
             ***********
            हमारे रायगढ़ पूर्वांचल में महान व्यक्ति भी हैं जो अपनी ही जाति के़ लिए नहीं सम्पूर्ण समाज की सेवा करते हैं| अधिकतम समय तथा तन मन धन दे रहे हैं| उन्हें नमन करते हुए उनकी गाथा लिखूंगा|

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें