रविवार, 17 दिसंबर 2017

यः धारयति सः धर्मः

यः धारयति सः धर्मः| जो धारण करे वह उसका धर्म है|
जरूरी नहीं कि कोई हिंदू मुस्लिम.... धर्म ही धारण करे| वह मानवता सच्चाई प्रेम को भी धारण कर सकता है| वही उसका धर्म होगा|

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें