Meraj Anwar
ये तो सभी जानते हैं कि अपने पैग़म्बर की नक़ल करना सुन्नत कहलाता है। मसलन दाढ़ी रखना, क़ुर्बानी करना, कुर्ता पायज़ाम पहनना, बकरी चराना, लौकी खाना... ऐसी बहुत सारी चीज़ें हैं जिसे सुन्नत कहा जाता है।
पर कुल मिलाकर सारा का सारा सुन्नत केवल दाढ़ी बढ़ाना, मूँछे काटना, छोटा पायज़ाम पहनना और बड़ा कुर्ता पहनना पर ही क्यूँ अटक गया हैं? और लोग इसे कट्टरता से मानते भी हैं। माने दाढ़ी के बारे में कुछ कह दो तो लोग ग़ुस्सा हो जाते हैं। इस्लाम से ख़ारिज तक बता देते हैं। ज़िंदगी भर लोग धार्मिक कृत्य मानकर दाढ़ी ढोते रहते हैं...
जितनी कट्टरता से दाढ़ी ढोया जाता है उतनी कट्टरता से रोज़ लौकी खाना, बकरी चराना, खेत में लोटा लेकर जाना, ऊँट पर सवारी करना... आदि इत्यादि क्यूँ नही माना जाता है?
या फिर दाढ़ी-मूँछ कपड़े को एक धार्मिक सिम्बल बना देने की जगह... फ़ैशन के हिसाब से क्यूँ नही बदलते रहते हैं लोग? जैसे कि जब मन हो लौकी खाना और जब मन हो भिंडी..
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
बुधवार, 15 नवंबर 2017
नकल करना ही धर्म है?
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