आश्चर्य है हम आज भी कितने असहिष्णु हैं|
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अंतर्जातीय विवाह भारतीय दंड संहिता के अनुसार कोई अपराध नहीं है| शासन ऐसे विवाह को प्रोत्साहन करती है|
लेकिन कुछ जातीय सामाजिक संगठन इस विवाह को स्वीकार नहीं करते| उस परिवार को बहिष्कार का दंड दिया जाता है| बहिष्कार से बचने के लिए समाज के पारम्परिक नियम अनुसार लड़़का/लड़की को मृत मानकर उनके घर के लोगों को बिसर खाना पड़ता है तथा डाति समाज को मृतक भोज देना पड़ता है|
हमारे समाज के इस क्रूरता के कारण अंतर्जातीय विवाह के इच्छुक लड़के लड़कियां आत्महत्या भी कर लेते हैं|
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क्या इसपर विचार नहीं करना चाहिए? या परम्परा को ढोते रहना ही उचित है?
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पौराणिक काल, महाभारत काल में अंतर्जातीय विवाह समाज में स्वीकार था| फिर आज क्यों नहीं?
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
शुक्रवार, 24 नवंबर 2017
अंतर्जातीय विवाह
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