मेरे विचार से बच्चों के लालन पोषण तथा यौन क्षुधा की पूर्ति के लिए विवाह एक सामाजिक व्यवस्था है। पति पत्नी के बीच एक अलिखित समझौता है किसके अनुसार वे एक दूसरे के सुख दुख में भागीदार होते हैं, सम्भोग करते हैं, अपने परिवार का मिलकर दायित्व संभालते हैं ।
किराये के मकान में रहने से उस मकान से भी प्यार हो जाता है । स्वाभाविक है शादी के बाद पति पत्नी के बीच प्यार पनपता है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें