Dinesh Aastik
भगवान कहाँ?
जो यज्ञ करते हैं वे जानते हैं कि यज्ञ से कोई देवता प्रसन्न नहीं होता । जिन मन्त्रों का उच्चारण किया जाता है, वे अगर संस्कृत से हिंदी में कर दिए जायें तो प्राइमरी स्कूल की क़िताब के लायक हैं । पुजारी जानता है, भगवान् चाहे कहीं और हो मगर मंदिर में तो कतई नहीं है । मुसलमान जानता है कि ख़ुदा कहीं होगा तो मस्जिद के बाहर होगा, यहाँ तो नहीं है । मगर अपना धन्धा इसी में सुरक्षित है कि लोगों को विश्वास दिलायें कि यज्ञ से उनका कल्याण होगा । मंदिर और मस्जिद में की गयी पुकार भगवान् एकदम सुनता है । सीधी 'हॉट लाइन' है ।
~ दलितों को पीटने का यज्ञ
हरिशंकर परसाई
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
गुरुवार, 31 अगस्त 2017
यज्ञ और मंत्र
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