Radheshyam Mahaseth
और इन सबके बीच भाजपा सांसद साक्षी महाराज के मीठे बोल | पढ़ लीजिए ,सुन लीजिए | दिल को शान्ति मिलेगी , सुकून होगा | जनतंत्र में आस्था बढ़ेगी | साक्षी महाराज ने कहा " न्यायपालिका को उसकी औकात में रहनी चाहिए , न्यायलय हमारी संस्कृति को बदनाम कर रही है , बाबा राम रहीम के है लाखों अनुयायी है , अपने फैसले पर विचार करे न्यायपालिका | " ठीक यही बात 2013 में उस वक्त उमा भारती बोली थी जब आसाराम को गिरफ्तार किया गया था | " तो क्या माना जाए , बलात्कार ही है हिन्दुस्तान की संस्कृति ? बलात्कारियों को बचाना ही हिन्दू धर्म है ?और बलात्कार के इस संस्कृति के खिलाफ फैसला देने अक्धिकार किसी में नही ? आरएसएस जिस संस्कृति की बात करता है ,क्या उसकी सच्चाई यही है ? और फिर सही -गलत का फैसला जब समर्थकों की संख्या देखकर ही होगी ,तब तो देश के सभी भ्रष्ट नेताओं के पास करोड़ों समर्थक है ? फिर तो वे सभी निर्दोष हुए | आपको बताते चले कि साक्षी महाराज खुद भी हिन्दू धर्म गुरु है | भगवा चोला धारण करते है | इनके ऊपर भी न्यायालय में बलात्कार और हत्या के दो मामले दर्ज है | क्या साक्षी महाराज को अपना काला भविष्य नजदीक आता दिख रहा है ? लेकिन सवाल साक्षी महाराज या किसी भोगी नाथ जैसों तक की नही है | चिंताजनक स्थिति तो यही है कि जब क़ानून बनाने वाली संसद में बलात्कारी बाबाओं को बैठने और बोलने का मौका मिलने लगे तो जाहिर है कार्यवाही बलात्कारियों के खिलाफ नही बल्कि बलात्कार पीड़ितों के ही खिलाफ होगी | आवाज इंसाफ के लिए नही बल्कि जुल्मियों के पक्ष में ही बुलंद होगी | और तब महिला सुरक्षा और समृद्धि की बात ,नेताओं के जुबान से मजाक नही तो क्या समझा जाए ? याद रहे उसी हरियाणा में पीएम मोदी ने बेटी बचाओ का नारा भी दिया था ,यूपी चुनाव के दौरान जोर -शोर से महिला सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया था | तो क्या अब मोदी अपने इस बेशर्म सांसद के खिलाफ कार्यवाही करेंगे ? उन दो महिलाओं के दर्द को समझेंगे जिसने ऐसे ताकतवर राम -रहीम के खिलाफ पिछले पन्द्रह सालों से लड़ाई लड़ रही , जिस राम -रहीम के चरणों में अमित साह शीश झुकाते है ,मनोहर लाला खट्टर नतमस्तक होते है ,भाजपा सहित तमाम दलों के नेता जिसकी आरती उतारते है ? क्या किसी नेता ने उन दो महिलाओं के पक्ष में बयान दिया ,उसके घर जाकर हौसला अफजाई की ? आप सोच लीजिए उन महिलाओं के ऊपर इन पन्द्रह सालों में कैसे -कैसे जुल्म हुए होंगे ? कितनी धमकियां मिली होंगी ? कितना सताया गया होगा ? मगर सलाम करिए उन दोनों महिलाओं को जिसने अपनी जिद्द और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की जूनून की बदौलत इस बलात्कारी बाबा को सलाखों में पहुंचा दिया ,जिस बाबा के समर्थन में आपके सांसद खुलकर बयान दे रहे है |और तब एक सवाल यह भी कि धर्म माना किसे जाए ?
इन बाबाओं के पाखण्ड और कर्मकांडों को , या फिर महात्मा गांधी के उस शब्द को जिसमे उन्होंने कहा कि " सत्य ही इश्वर है ,सेवा ही धर्म है " ,विवेकानंद के उन विचारों को जब उन्होंने कहा " मानव सेवा ,दीन -दुखियों की सहायता ही धर्म है " | वाकई अगर धर्म और धर्म गुरु के मायने आपके लिए वही रह गए है जो साक्षी महाराज ,राम -रहीम ,रामपाल ,आदित्यनाथ और आसाराम जैसे पाखंडियों के बोल है तब फिर दुनिया थूकेगी आपके इस धर्म और संस्कृति पर | दुनिया में कही मुंह दिखाने के लायक नही रहेंगे आप | और तब यूरोपीयन आपको असभ्य ,अशिक्षित ,गंवार नही तो क्या तार्किक ,बौद्धिक और विवेकशील समझेगा |
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
रविवार, 27 अगस्त 2017
न्यायालय हमारी संस्कृति को बदनाम कर रही है?
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