धार्मिक पुस्तकों को समझने के लिये बुद्धि और तर्क की जरूरत नहीं है, बल्कि अज्ञान और अन्धविश्वास की आवश्यकता होती है। यदि आपके पास तार्किक बुद्धि है तो इन्हें पढ़ने के बाद आपका इनकी सच्चाई से विश्वास उठ जायेगा। आपके मन में जो सवाल उठेंगे, उनका उत्तर न मिलने के कारण आप आस्तिक से नास्तिक बन जायेगे। कहने का अर्थ है कि धार्मिक पुस्तकें तार्किक बुद्दि के कारण मनुष्य को नास्तिक बनाती हैं।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें