रविवार, 27 अगस्त 2017

आस्था की दुकानदारी

Manish Chouhan
आस्था की दुकानदारी:-
नमस्कार दोस्तो,भरे मन से ही सही आपके लिए आज का दिन शुभ होने की दुआ करता हूं।
रेप जैसे संगीन गुनाह पर एक ढोंगी बाबा को दोषी करार दिया जाता है और पूरे पश्चिमोत्तर भारत में उसके गुंडों का तांडव शुरू हो जाता है। इधर प्रधानमंत्री घोषणा करते हैं कि आस्था के नाम पर किसी की भी गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी (यह जानते हुए भी कि उनकी तो पार्टी ही इसी आस्था नाम की बुनियाद पर टिकी है) तो दूसरी ओर उन्हीं की पार्टी का मुख्यमंत्री हालात को बेकाबू होने देता है। पार्टी का एक भी नेता इस ढोंगी बाबा की निंदा नहीं करता, बल्कि उसके एक सांसद साक्षी महराज उसके बचाव में यह कहते हुए खड़े हो जाते हैं कि उस पर केवल एक महिला ने आरोप लगाए हैं जबकि लाखों-करोड़ों लोग 'उनके' साथ खड़े हैं। यह वही सोच है, वही संख्या- बल है जिसके सहारे पार्टी निरंतर जनता की समस्याओं के प्रति असंवेदनशील बनी रहती है।
न्यायालय में बहस पूरी हो जाने के बाद फैसले की तारीख भी तय हो जाती है फिर भी हरियाणा सरकार के दो मंत्री अनिल विज और राम विलास शर्मा 10 अगस्त को सिरसा के डेरे में (या यों कहें कि अड्डे पर) मनाए जा रहे ढोंगी बाबा के जन्मदिन समारोह में भाग लेने जाते हैं और 51 लाख का गिफ्ट चैक दे कर चले आते हैं। आत्मा पर लेषमात्र भी कोई बोझ नहीं। कोर्ट बार बार निर्देश देता है कि भीड़ को इकट्ठा मत होने दें, लेकिन प्रशासन है कि धारा 144 तक नहीं लगाता और कोर्ट में इसे क्लैरीकल भूल बताता है। तारीख, समय और तबाही मचाने वाले लोगों का पता होने के बावजूद हरियाणा सरकार नागरिकों के जान-माल की रक्षा नहीं कर पाती। इसे प्रशासन की काहिली और नाकामी कहें या अनावश्यक दबाव बनाने की सियासी चाल ! फैसला तो आपको करना है ।
बात केवल एक राजनीतिक पार्टी की हो ऐसा भी नहीं है। लगभग सभी पार्टियां इसी सिंड्रोम से ग्रस्त हैं। इस मामले में कांग्रेस,भाजपा और अकाली दल कोई भी अछूता नहीं है। आखिरकार सवाल तो एक करोड़ वोटों के एक साथ झोली आ गिरने की बात है भाई ! कैसे उस व्यक्ति के पांव न छुए जाएं? हमारे प्रधानमंत्री ने भी अगर छू लिए तो कौन सा आसमान टूट पड़ा !
लेकिन इस सब का दुखद पहलू यह है कि मीडिया या किसी भी नेता ने रेप की शिकार दोनों साध्वियों के प्रति सांत्वना का एक शब्द भी कहना मुनासिब नहीं समझा;
मामले को अंजाम तक पहुंचाने वाले सीबीआई जांबाज अफसर डीएसपी डागर की प्रशंसा में दो बोल नहीं बोले और न ही ढोंगी बाबा का पर्दाफाश करने वाले बहादुर पत्रकार राम चंद्र छत्रसाल के साहस और ईमानदारी को याद किया। याद रहे इस पत्रकार को इसकी कीमत अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी है। उसे काफी समय तक धमकियां दी गई, फिर भी नहीं माना तो गोली मार कर हत्या कर दी गई । गोली लगने के बावजूद पीजीआई, चंडीगढ़ में ईलाज के लिए दाखिल वह व्यक्ति बीस दिन तक जीवित रहता है और बयान देना चाहता है लेकिन हरियाणा पुलिस उसका बयान तक नहीं लेती।
एक हो तो बात भी की जाए। पूरे देश में कुकरमुत्तों की तरह उग आए और मौजूद ऐसे ही ढोंगियों के आश्रम निरीह जनता की आस्था का ही कारोबार करते हैं। भूल जाइए कि कोई भी आपको इनके मोहपाश से कभी आजाद कर सकता है। नेता लोग तो इन्हें बढ़ावा देकर अपना उल्लू सीधा करने में लगे रहेंगे ; अपनी मदद तो आपको स्वयं ही करनी होगी।

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