Yash Baghel
अगर धार्मिकों के दृष्टिकोण से देखा जाए तो कम से कम 99% नास्तिक हैं। क्योंकि झूठ, बेईमानी, भ्रष्टाचार में 99% लोग लिप्त हैं। यदि इनको ईश्वर पर आस्था होती तो यह काम बिलकुल भी नहीं करते! मगर यह जानते हैं कि ईश्वर नहीं है इसलिए यह सब करते हैं। और बाकी के नास्तिक हैं जो इन धार्मिक किताबों पर विश्वास नहीं करते तो वह गिने चुने ही है।
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
गुरुवार, 31 अगस्त 2017
90% लोग भगवान को नहीं मानते
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