बुधवार, 9 अगस्त 2017

ढोंग

Amita Ambedkar
ढोंगी बाबाओं और माताओं से ये देश इतना सम्मोहित कैसे हो जाता है? ये बहुत गजब की बात है. न सिर्फ अनपढ़ और अशिक्षित लोग बल्कि डिग्रीधारी और विश्वविद्यालयों में पढ़े लिखे लोग भी इस मूर्खता में शामिल हैं. मैंने कई उच्च शिक्षितों के घरों में नीबू मिर्ची लटकते हुए देखा है, वे रोज सोने से पहले एक झाडू से अपने बच्चों की नजर उतारते हैं, खाना खाने के लिए, नहाने के लिए, सोने के लिए जागने के लिए और हर काम के लिए उनके पास कोई मन्त्र होता है.
ऐसे सभी बाबाओ गुनियाओं ओझाओं का समाज पर इतना प्रभाव बना हुआ है. बचपन से ही मूर्खतापूर्ण शास्त्रों और कथाओं से बच्चों के मन में देवी देवता भूत प्रेत और चमत्कारों की बात बैठा दी जाती है. वे विज्ञान और तर्क सीख पायें इसके पहले ही बाबाजी उनके दिमाग में घुस जाते हैं.
इस धंधे को बंद करने का एक ही तरीका है. अपने बच्चों को इन बाबाओं गुरुओं से बचाइये. देवी देवताओं से बचाइये. हो सके तो उन्हें किसी पूजा, यज्ञ, हवन बलि और कथा पंडाल आदी से दूर रखिये. पहले खुद इस मूर्खता को समझिये और अपने बच्चों को समझाइये कि ये सब षड्यंत्र हैं जो तुम्हें कमजोर और डरपोक बनाने के लिए रचा गया है. आप देखेंगे एक बार बच्चा थोड़ा सा नास्तिक और निडर हो जाए उसके बाद उसमे वैज्ञानिक चेतना और तर्कशीलता का जन्म कितनी तेजी से होता है. एक नया ही व्यक्तित्व उसमे उभरता है.
आपको अगर बाबाओं, गुरुओं और माताओं का धंधा बंद करना है तो खुद नास्तिक बनिए और अपने बच्चों को भी इंसान बनाइये अपने बच्चों को किसी मूर्ख का भक्त होने से बचाना आपकी जिम्मेदारी है |
ये वो महिलायें हैं जो घर के बाहर हल्दी की छाप लगा रही है ताकि इनके बाल ना कटे अन्धविश्वास की भी कोई हद होती है यार 😡😡😡

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