Rattan Lal Gottra
किसी भी तरह का अंधविश्वास , किसी भी तरह का भगवान के नाम का लालच या डर , हरदम गर्त में लेकर जाता है।
जो लोग राम रहीम की हरकतों को देख कर आंखें मूंदे हुए है और अंधविश्वास से प्रेरित पुरानी ओर नई प्रथाओं को सपोर्ट कर रहे है, कोई इस वजह से प्रथाओं का वहन कर रहा है कि उनके पूर्वज सालो से मानते आ रहे है, वो निश्चित ही मानसिक गुलाम है।
मनुष्य हर पीढ़ी में नया बदलाव लाता है, उसमे दिमाग का विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो बदलते वक्त, विचारो को ग्रहण करके ही सम्भव है।।
कोई भी धार्मिक, अंधविश्वास से भरी मान्यता केवल डर और लालच पैदा कर सकती है।किसी तरह का आत्मविश्वास नही।।
हमारा लक्ष्य उच्च शिक्षा होनी चाहिए जो हमे ये निर्धारित करने में सहायक हो कि क्या सही है या गलत।।
अगर हमने पुरानी, outdated प्रथाओं को नही छोड़ा तो राम रहीम जैसे कितने बाबा,पण्डे,पुजारी हमारे घरों में हवन,पूजा,शादी, ब्याह के नाम पर घर मे घुसेंगे और हमारी माताओ, बहनो,बेटियो के साथ मुँह काला करेंगे।
अभी वक़्त है खुद को समाज को सक्षम बनाने का, जुड़ने का ओर लोगो को जोड़ने का।
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
मंगलवार, 29 अगस्त 2017
धार्मिक अंधविश्वास
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें