गांधी जी आज़ादी चाहते थे
गांधी जी अहिंसा वादी थे, आदर्शवादी थे... वो शांतिमय तरीके से आज़ादी चाहते थे
(जैसा कि एक पक्ष कहता है)
तो
भगत सिंह भी आज़ादी चाहते थे...
भगत सिंह आक्रामक थे, उन्होंने ज़ुर्म के खिलाफ हिंसक तरीके से आवाज़ उठाई, अंग्रेजों को मारकर भगाया।
(जैसा कि दूसरा पक्ष कहता है)
गांधी जी अहिंसा वादी थे, आदर्शवादी थे... वो शांतिमय तरीके से आज़ादी चाहते थे
(जैसा कि एक पक्ष कहता है)
तो
भगत सिंह भी आज़ादी चाहते थे...
भगत सिंह आक्रामक थे, उन्होंने ज़ुर्म के खिलाफ हिंसक तरीके से आवाज़ उठाई, अंग्रेजों को मारकर भगाया।
(जैसा कि दूसरा पक्ष कहता है)
लेकिन गांधीवादियों की नज़र में भगत सिंह एक हिंसक व्यक्ति थे
और
भगत सिंह के मानने वालों की नज़र में गांधीजी दोगले थे ।
भगत सिंह के मानने वालों की नज़र में गांधीजी दोगले थे ।
इसमें शहीद भगत सिंह या गांधी जी की गलती नहीं;
गलती है आप लोगों की सोच की...
क्योंकि आप उनकी नीयत न देखकर तरीका देखने चले...
मेरी नज़र में हिंसा गलत है तो दूसरे की नज़र में ज़ुर्म के खिलाफ आवाज़ उठाना सही है... हिंसक होना सही है लेकिन सिर्फ अपनी इन वजहों के कारण हम दूसरे शहीदों या महापुरुषों के चरित्र पर लांछन नहीं लगा सकते।
गलती है आप लोगों की सोच की...
क्योंकि आप उनकी नीयत न देखकर तरीका देखने चले...
मेरी नज़र में हिंसा गलत है तो दूसरे की नज़र में ज़ुर्म के खिलाफ आवाज़ उठाना सही है... हिंसक होना सही है लेकिन सिर्फ अपनी इन वजहों के कारण हम दूसरे शहीदों या महापुरुषों के चरित्र पर लांछन नहीं लगा सकते।
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