सोमवार, 14 अगस्त 2017

हम इंसान गवां बैठे

Dharmaraj Mahapatra
मस्ज़िद तो हासिल हमको , खाली इमान गवा बैठे.....
मंदिर को बचाया लड़-भीड़ कर, खाली भगवान गवा बैठे.....
धरती को हमने नाप लिया, हम चाँद सितारों तक पहुचे....
पूरी कायनात को जीत लिया, हम खाली इंसान गवा बैठे.....
मजहब के ठेकेदारों ने फिर आज, हमे यू भड़काया....
काजी और पंडित जिन्दा थे, हम अपनी जान गवा बैठे

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