Dharmaraj Mahapatra
मस्ज़िद तो हासिल हमको , खाली इमान गवा बैठे.....
मंदिर को बचाया लड़-भीड़ कर, खाली भगवान गवा बैठे.....
धरती को हमने नाप लिया, हम चाँद सितारों तक पहुचे....
पूरी कायनात को जीत लिया, हम खाली इंसान गवा बैठे.....
मजहब के ठेकेदारों ने फिर आज, हमे यू भड़काया....
काजी और पंडित जिन्दा थे, हम अपनी जान गवा बैठे
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
सोमवार, 14 अगस्त 2017
हम इंसान गवां बैठे
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