Dr Vijay Mehta
हिंदू और मुसलमानों को कोई काम करने का मौका मिले तो उन्हे मंदिर /मस्जिद बनाने का ख़याल ही क्यों आता है ??सार्वजानिक प्लॉट ,सरकारी ज़मीन ,सड़क ...कहीँ भी धर्मस्थल ही बनाने को उत्सुक. ...लॉग पैसे देने को भी तैयार .
देष में स्कूलों से ज्यादा मंदिर है .अब और ज़रूर नहीँ .(कम करने है )मंदिर के घंट से ज्यादा स्कूल का घंट समाज को ज्यादा उपयोगी साबित हुआ है .
कोई गाँव ,शहर में कितने पुस्तकालय है उससे उस शहर का CI- culture index नापा जा सकता है .
मुजे खुशी होती अगर UAE मे मंदिर के बदले science museum के लिये जगह मिलती .
सत्य को जानने की कोशिश करनी चाहिए. सत्य जानने के लिए उलट पुलट हर तरह के विचार पढ़ कर सोचना चाहिए. किसी लोखी गई या कही गई बात को आँख बंद कर नहीं मानना चाहिए. सत्य ही सुन्दर है. सत्य ही कल्याणकरी है.
शनिवार, 19 अगस्त 2017
मंदिर मस्जिद के बदले साइंस म्युजियम
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