Ajay Kumar _
मान लीजिये कि God होता है
लेकिन समस्या ये है कि दुनिया में हज़ारों किस्म के छोटे-बड़े God हैं, किसको असली God माना जाये ?
कोई भी God अपनी शक्ल नहीं दिखाता, अपना पता-ठिकाना नहीं बताता तो किसको असली माना जाये ?
कुछ लोगों ने God के रिश्तेदार होने का दावा किया है,
ैलेकिन दिक़्क़त ये है कि किस रिश्तेदार पे विश्वास किया जाये, और क्यों विश्वास किया जाये ?
कभी God ने तो कहा नहीं कि वो मेरा रिश्तेदार या ख़ास बंदा है..
कुछ अध्यात्मक इन्सान हुए, जो आज के धार्मिक लोगों की तरह जीवनभर किसी God का गुणगान करते रहे, उन्होंने रिश्तेदार होने का दावा नहीं किया,
लेकिन भक्तों ने उनको भी God का रिश्तेदार मान लिया,
या उनको ही God मान लिया.
सदियों पहले कुछ लोगों ने कहानियां लिखी, उन कहानियों के कुछ पात्रों को God मान लिया गया,
सदियों पहले कुछ समझदार इन्सानों ने जीवन उपयोगी चीज़ों और कुदरती शक्तियों के प्रतीक बनाये, करोड़ों लोगों ने उन प्रतीकों को God मान लिया..
पिछली सदियों में अलग-अलग तरीक़े से हज़ारों God बनाये गये.. आज भी हज़ारों किस्म के God बनते हैं.
एक बंदे ने धार्मिक पहनावा पहनकर जादू के चार ट्रिक दिखाये तो करोड़ों लोगों ने उसको God मान लिया,
एक फ़क़ीर मांगकर खाता था,
वो मर गया तो करोड़ों लोगों ने उसको God मान लिया..
लोग तो मानसिक विकलांगों को भी God बना देते हैं, कोई शातिर बनना चाहे तो क्या मुश्किल है ?
इस वक़्त देशभर में जीते-जागते हज़ारों God हैं, जिनको करोड़ों लोग मानते हैं.
रोज़ नये-नये God सामने आते हैं , और आते रहेंगे..
अब हज़ारों किस्म के God हैं, किस God को असली माना जाये ?.. मानने की ज़रूरत भी क्या है ?
किसी झूठ में आस्था रखने वाले को अगर आस्तिक कहते हैं, तो मुझे गर्व है कि मैं सच में आस्था रखने वाला नास्तिक हूँ..
हर आस्तिक को ये पता होना चाहिये, ,कि दूसरे धर्मों के लोग उसको भी नास्तिक मानते हैं..
हर आस्तिक पांच-छह सौ करोड़ लोगों की नज़र में नास्तिक होता है...
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